गर्मी के मौसम में खीरा, ककड़ी और गोंद कतीरा जैसी ठंडी तासीर वाली चीजों को खाना चाहिए. गर्मी में कूलिंग इफेक्ट्स के लिहाज से देखा जाए तो सत्तू की तरह गोंद कतीरा भी लिस्ट में आता है. पर सवाल है कि आखिर ठंडी तासीर का होने के बावजूद गोंद कतीरा को पहले कुछ देर पानी में भिगोया क्यों जाता है? आप चाहे तो इसका पाउडर बनाकर सीधे खा भी सकते हैं. गोंद कतीरा को इंग्लिश में Tragacanth Gum कहते हैं और ये एक नेचुरल गोंद है जिसे झाड़ियों के रस से बनाया जाता है.आज भी भारत में इसे गर्मियों के दौरान पेट को ठंडा रखने के लिए पानी में डालकर पीया जाता है. माना जाता है कि ये हमें लू से बचाता है और शरीर की गर्मी को कम करता है. इसके अलावा इसके सेवन से थकान भी मिट जाती है. चलिए आपको बताते हैं कि आखिर इसे भिगोकर ही क्यों खाया या पीया जाता है.
गोंद कतीरा को भिगोना क्यों है जरूरी
ज्यादातर लोग गोंद कतीरा को पानी में ही भिगोते हैं. इसके बाद इसे चिया सीड्स या दूसरी स्मूदीज में डालकर खाते हैं. इसे भिगोने का सबसे बड़ा कारण इसकी गजब की सोखने की क्षमता है. एक्सपर्ट के मुताबिक इस गोंद में प्राकृतिक पॉलीसैकराइड (Polysaccharides) होते हैं और ऐसे कार्बोहाइड्रेट पानी को तेजी से सोख लेते हैं.इसलिए जब इसे पानी में डाला जाता है, तो यह अपने वजन से कई गुना ज्यादा पानी सोखकर जेल जैसा बन जाता है. यही कारण है कि सूखा छोटा टुकड़ा भिगोने के बाद फूलकर काफी बड़ा दिखने लगता है.
बॉडी को ठंडा रखने का फायदा
भिगोने की वजह से गोंद कतीरा में पानी कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है. जब ये जेल हमारे शरीर में जाती है तो पानी को देर तक स्टोर करके रखती है. इस तरह हमारा शरीर देर तक नेचुरली हाइड्रेट रह सकता है. इसलिए कहा जाता है कि खाने या पीने से पहले इस देसी चीज को भिगोना बहुत जरूरी है. इसी वजह से इसे गर्मियों में नेचुरल कूलेंट माना जाता है. सांइटिफिकली देखे तो गोंद कतीरा की हाई वॉटर-रिटेंशन क्षमता शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद कर सकती है.























































