जस्टिस उज्जल भुइयां सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ न्यायाधीश हैं, जिनका कानूनी करियर काफी प्रभावशाली और विविधतापूर्ण रहा है। उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाला मामले में जमानत देते समय सीबीआई की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी की। उन्होंने सीबीआई से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की अपेक्षा जताई और कहा कि जांच एजेंसी को पिंजरे में बंद तोते की छवि से बाहर आकर स्वतंत्र तोते की तरह काम करना चाहिए। उनकी टिप्पणियाँ लोकतंत्र और निष्पक्ष जांच की महत्ता पर जोर देती हैं, और यह सुनिश्चित करती हैं कि कोई भी एजेंसी पक्षपातपूर्ण तरीके से काम न करे।
जस्टिस उज्जल भुइयां का जीवन परिचय:
– जन्म: 2 अगस्त 1964, गुवाहाटी, असम।
– शिक्षा: गुवाहाटी के डॉन बॉस्को हाई स्कूल और कॉटन कॉलेज से स्कूली और कॉलेज शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने किरोड़मल कॉलेज, दिल्ली से स्नातक किया और गुवाहाटी से LL.B. व LL.M. की डिग्री हासिल की।
– करियर: उन्होंने 1991 में असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों की बार काउंसिल में खुद को पंजीकृत किया और गुवाहाटी हाई कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की। वे आयकर विभाग के 16 साल तक स्थायी वकील रहे।
– न्यायिक पद: 2011 में गुवाहाटी हाई कोर्ट के अतिरिक्त जज बने और 2013 में स्थायी जज नियुक्त हुए। 2019 में बॉम्बे हाई कोर्ट और फिर तेलंगाना हाई कोर्ट के जज बने। 14 अगस्त 2023 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में नियुक्त किया गया।
उनकी कानूनी विशेषज्ञता और निष्पक्षता के प्रति समर्पण उन्हें एक प्रभावशाली न्यायाधीश के रूप में प्रतिष्ठित करती है।















