जमीयत ने की जम्मू-कश्मीर में की बाढ़ पीड़ितों की मदद,

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने आज पहले चरण में जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में 15 नव-निर्मित मकानों की चाबियां बाढ़ प्रभावित परिवारों को सौंपीं. इनमें 7 विधवाएं भी शामिल हैं. यह घर जमीयत उलेमा राजस्थान के सहयोग से बनाए गए हैं.बाढ़ प्रभावितों ने जमीयत का आभार जताते हुए कहा, “दिलासा तो सबने दिया, मगर काम जमीयत उलमा-ए-हिंद ने ही किया.” चाबियां मिलने के बाद प्रभावितों ने भावुक होकर अपना आभार व्यक्त किया.उन्होंने मौलाना मदनी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा, “शुक्रिया मौलाना मदनी, आपने हमारे दर्द को महसूस किया.” कई लोग इतने भावुक हुए कि उनकी आंखें खुशी के आंसुओं से भर आईं.

जमीयत बिना किसी धार्मिक भेदभाव के सभी प्रभावितों की मदद कर रही है- मदनी

मौलाना मदनी ने कहा कि जमीयत बिना किसी धार्मिक भेदभाव के सभी प्रभावितों की मदद कर रही है, क्योंकि मानवता की सेवा ही उसका मकसद है. उन्होंने कहा, “कोई भी मुसीबत यह पूछकर नहीं आती कि कौन हिंदू है और कौन मुसलमान.उन्होंने आगे कहा कि कश्मीर हमारा है, कश्मीरी भी हमारे हैं. इस अवसर पर मौलाना अरशद मदनी ने देश में बढ़ती सांप्रदायिकता और कश्मीर के प्रति रवैये पर गंभीर चिंता जताई.

मदनी ने दिखाया कश्मीर पर साफ रुख

मदनी ने दोहराया कि कश्मीर ही हमारा नहीं, कश्मीरी भी हमारे हैं और कश्मीरियों के दिल जीतने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने पहलगाम घटना के बाद कश्मीरी जनता द्वारा दिखाए गए भाईचारे का उदाहरण दिया.साथ ही उन्होंने हिंदू राष्ट्र के सपने पर भी हमला बोला, मौलाना मदनी ने कहा, “नफरत के सौदागरों और हिंदू राष्ट्र का सपना देखने वालों को नेपाल से सबक लेना चाहिए,” यह दर्शाते हुए कि लोकतंत्र और संविधान ही देश की तरक्की का आधार हैं.

नफ़रत की राजनीति पर जताई चिंता

उन्होंने उत्तराखंड व हिमाचल में कश्मीरियों के साथ भेदभाव की घटनाओं पर चिंता जताई और कहा कि नफरत का जवाब मोहब्बत से देना चाहिए. उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक ताकतें इस्लाम और मुसलमानों को मिटाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन यह सपना कभी पूरा नहीं होगा.अपने संबोधन के आखिर में उन्होंने आशा जताई की कि एक दिन ऐसा ज़रूर आएगा जब ज़ालिमों के गले में जंजीरें होंगी और देश फिर प्यार-मोहब्बत और इंसाफ की छाया में तरक्की करेगा.मौलाना मदनी ने चेतावनी दी कि नफ़रत की राजनीति देश की शांति और एकता के लिए गंभीर खतरा है और धर्म के आधार पर लोगों को बांटना देश को बांटना है. उन्होंने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद धर्मनिरपेक्षता और संविधान की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करती रहेगी.

 

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