विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि भारत भी संयुक्त राष्ट्र के समुद्री और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का समर्थन करता है। उन्होंने बताया कि ईरानी की तरफ से एक जहाज के गलत जगह फंसने को लेकर सूचना मिली थी।भारतीय विदेश मंत्री का यह बयान श्रीलंकाई तट के करीब ईरानी युद्धपोत को डूबा दिए जाने के बाद आया है।
भारत अंतरराष्ट्रीय कानूनों का समर्थन करता हैः जयशंकर
नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग में बोलते हुए जयशंकर ने शनिवार को कहा, “मैं भी संयुक्त राष्ट्र के समुद्री और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का समर्थन करता हूं। हमें ईरान की तरफ से संदेश मिला कि उनका एक जहाज जो उस समय शायद हमारी सीमा के करीब था, हमारे बंदरगाह पर आना चाहता था। उन्होंने बताया कि वे कुछ समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
ईरानी जहाज ने मांगी थी मदद
विदेश मंत्री ने कहा, “एक मार्च को हमने कहा कि आप आ सकते हैं। उन्हें आने में कुछ दिन लगे और फिर कोच्चि में रुका। उनमें कई नए कैटेड्स थे। जब वे यहां आए और यहां से गए तो हालात बिल्कुल अलग थे। वे फ्लीट रिव्यू के लिए आ रहे थे। लेकिन गलत दिशा में फंस गए। श्रीलंका में भी एक के साथ ऐसी ही सिचुएशन थी, उन्होंने जो फैसला लिया, वह उन्होंने किया और उनमें से एक बदकिस्मती से ऐसा नहीं कर पाया… हमने सिचुएशन को इंसानियत के नजरिए से देखा, कानूनी मसलों के अलावा और मुझे लगता है कि हमने सही काम किया।”
विदेश मंत्री बोले हिंद महासागर की असलियत को समझें
विदेश मंत्री ने यह भी कहा, “इस पर सोशल मीडिया पर बहुत बहस चल रही है…. कृपया हिंद महासागर की असलियत को समझें। डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में रहा है। पिछले पांच दशकों से महासागर… तथ्य यह है कि जिबूती में विदेशी सेनाएं स्थित हैं, यह पहली बार हुआ।”
भारत अपनी तरक्की खुद तय करेगा
जयशंकर ने कहा, “अगर हमें हिंद महासागर की एक तरह की भावना या पहचान बनानी है, तो उसे संसाधन, काम, प्रतिबद्धता, प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स से सपोर्ट करना होगा… आप हिंद महासागर को कैसे बनाते हैं, इसके अलग-अलग पहलू हैं… हिंद महासागर ही एकमात्र ऐसा महासागर क्यों है जिसका नाम किसी देश के नाम पर रखा गया है – हम इसके ठीक बीच में हैं… हमारी ग्रोथ से, हिंद महासागर के दूसरे देशों को फायदा होगा। जो हमारे साथ काम करेंगे उन्हें ज़्यादा फायदे मिलेंगे… भारत की की तरक्की इंडिया से तय होगी… यह हमारी ताकत से तय होगी, दूसरों की गलतियों से नहीं…।















