क्या दिल्ली में सक्रिय है किडनैपिंग गैंग?

दिल्ली पुलिस ने राजधानी में लापता व्यक्तियों, खासकर बच्चों को लेकर सामने आ रही चिंताओं और सोशल मीडिया पर फैल रही चर्चाओं पर स्थिति साफ की है। पुलिस का कहना है कि लापता मामलों की बरामदगी एक लंबी और लगातार चलने वाली प्रक्रिया है, जिसे पुलिस केवल एक साल के आंकड़ों के आधार पर आंकना सही नहीं है।दिल्ली पुलिस के जॉइंट सीपी (PRO) संजय त्यागी ने कहा कि बीते सालों में दर्ज हुए कई लापता लोगों को बाद के वर्षों में ढूंढा गया है।

63% गुम लोगों का उसी साल पता लगा

उदाहरण के तौर पर 2016 में दर्ज 23 हजार से ज्यादा मामलों में से करीब 85% मामलों को इसके बाद के नौ साल में सुलझाया गया। 2025 में दर्ज मामलों में 63% गुम लोगों का उसी साल पता लगा लिया गया। जैसे पहले के मामलों में समय के साथ बरामदगी बढ़ी, वैसे ही 2025-2026 के मामलों को सॉल्व करने में भी आगे सुधार होगा। पुलिस अफसरों ने बताया कि कई बार बच्चे के स्कूल, ट्यूशन या पार्टी से देर से लौटने या कुछ समय तक फोन से संपर्क नहीं हो पाने पर भी परिजन एहतियात के तौर पर रिपोर्ट दर्ज करा देते हैं। बच्चे या व्यक्ति के मिलने के बाद उनकी सूचना वापस पुलिस को नहीं दी जाती।

लापता मामलों में कोई असामान्य बढ़ोतरी नहीं

जनवरी 2026 के आंकड़ों पर सफाई देते हुए दिल्ली पुलिस ने कहा कि इस महीने गुमशुदगी की 1,777 रिपोर्ट दर्ज हुई है, जो पिछले साल के औसत मासिक आंकड़े और जनवरी 2025 से भी कम है। यानी हाल के दिनों में लापता मामलों में कोई असामान्य बढ़ोतरी नहीं है। 2024 और 2025 की तुलना में भी स्थिति बेहतर रही है। 2024 में जहां करीब 24,900 लापता होने के मामले दर्ज हुए थे. वहीं 2025 में यह संख्या घटकर लगभग 24,500 रह गई। यानी साल दर साल मामलों में लगभग 2 प्रतिशत की कमी आई है।

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