जयपुर। बाढ़ नियंत्रण व्यवस्थाओं की हकीकत जानने के लिए स्वयं ने आम नागरिक “सीमा” बनकर बाढ़ नियंत्रण कक्ष की हेल्पलाइन नंबर पर फोन किया और व्यवस्थाओं की गंभीरता से जांच की। फोन के दौरान अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देश दिए कि शिकायत दर्ज करते समय उसका समय भी नोट करें और उसका निस्तारण कितने समय में किया गया, यह भी सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि आमजन द्वारा दी गई समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए। इसके साथ ही बाढ़ नियंत्रण कक्ष पर मिट्टी के कट्टों, मड पंपों एवं अन्य आवश्यक संसाधनों की भी जांच की गई।
अधिकारियों और कर्मचारियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि बाढ़ से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन — जैसे मड पंप, मिट्टी के कट्टे आदि — उपलब्ध हों और समय पर इस्तेमाल किए जा सकें।
गौरतलब है कि नगर निगम ग्रेटर जयपुर द्वारा शहर में चार बाढ़ नियंत्रण केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनमें मालवीय नगर बाढ़ नियंत्रण केंद्र, खिरनी फाटक फ्लाईओवर के नीचे स्थित पार्षद कार्यालय 39, मानसरोवर तथा विश्वकर्मा बाढ़ नियंत्रण कक्ष शामिल हैं।
साथ ही आमजन की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में शिकायतें तत्काल दर्ज की जा सकें और समय पर निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।















