बांग्लादेश और चीन के बीच बढ़ते रिश्तों को लेकर भारत में लगातार रणनीतिक और सुरक्षा से जुड़ी चर्चाएं हो रही हैं. संसद के मानसून सत्र में भी यह मुद्दा उठा, जहां सांसदों ने सरकार से पूछा कि क्या बांग्लादेश और चीन की बढ़ती साझेदारी भारत के हितों पर असर डाल सकती है. इस पर विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि भारत अपने पड़ोसी देशों में होने वाले हर ऐसे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखता है, जिसका भारत के हितों पर असर पड़ सकता है.विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में लिखित जवाब में कहा कि सरकार भारत के रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाती है. मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि भारत और बांग्लादेश के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और मजबूत रिश्ते हैं, जिन्हें आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत जारी है. भारत का बांग्लादेश के साथ रिश्ता किसी तीसरे देश के साथ उसके संबंधों पर निर्भर नहीं करता.
तीस्ता नदी पर भी दिया जवाब
सवाल में तीस्ता नदी परियोजना और प्रस्तावित चीन-बांग्लादेश-म्यांमार आर्थिक कॉरिडोर का भी जिक्र किया गया था. इस पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने तीस्ता नदी के बड़े स्तर पर प्रबंधन और सुधार से जुड़ी परियोजना और प्रस्तावित आर्थिक कॉरिडोर से संबंधित रिपोर्टों पर ध्यान दिया है.सरकार ने कहा कि तीस्ता नदी से जुड़े मुद्दों और बांग्लादेश के साथ व्यापार व आर्थिक रिश्तों को लेकर अपनी पूरी रणनीति बनाते समय इन सभी घटनाक्रमों को ध्यान में रखा जाएगा. यानी भारत इन परियोजनाओं पर नजर बनाए हुए है और जरूरत के हिसाब से अपनी रणनीति तैयार करेगा. हालांकि, विदेश मंत्रालय ने अपने जवाब में कहीं भी यह नहीं कहा कि बांग्लादेश-चीन के बढ़ते रिश्तों से भारत को फिलहाल कोई सीधा खतरा है. सरकार का रुख यही रहा कि वह क्षेत्र में हो रहे हर घटनाक्रम पर लगातार नजर रख रही है और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाती रहेगी. साथ ही, भारत-बांग्लादेश के आपसी रिश्तों को मजबूत बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है.























































