मुजफ्फरनगर में रक्तदान और नेत्रदान को लेकर चलाए जा रहे सामाजिक अभियानों का सकारात्मक असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। जिले की अग्रणी संस्था समर्पित युवा समिति और समर्पित महिला शक्ति द्वारा संचालित “जीते जी रक्तदान, जाते–जाते नेत्रदान” अभियान लोगों के बीच जागरूकता फैलाने में सफल साबित हो रहा है। अब लोग न केवल रक्तदान के लिए आगे आ रहे हैं, बल्कि मृत्यु के बाद नेत्रदान करने के लिए भी स्वेच्छा से निर्णय ले रहे हैं। इसी कड़ी में 6 अप्रैल को आर्य पुरी निवासी कृष्णा देवी के निधन के बाद उनके परिवार ने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके पुत्र विनोद, तरुण अरोड़ा और गुंजन अरोड़ा ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए नेत्रदान का निर्णय लिया।इस नेक कार्य को पूरा करने के लिए तरुण अरोड़ा ने अपने मित्र और सभासद सतीश कुकरेजा से संपर्क किया, जो समर्पित युवा समिति से जुड़े हुए हैं। सतीश कुकरेजा ने तुरंत अपने साथी और समिति के सक्रिय सदस्य अमित पटपटिया को इस बारे में जानकारी दी। इसके बाद अमित पटपटिया ने मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग से संपर्क साधा, जहां से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची और पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराया। डॉक्टरों के अनुसार, दोनों कॉर्निया पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें सुरक्षित रूप से संरक्षित कर लिया गया है।
जल्द ही इन्हें जरूरतमंद मरीजों में प्रत्यारोपित किया जाएगा, जिससे दो लोगों को नई दृष्टि मिल सकेगी।इस अवसर पर समर्पित युवा समिति के सदस्य हितेश आनंद और संदीप राज के साथ–साथ समर्पित महिला शक्ति की ओर से मनी पटपतिया और प्रीति कुकरेजा भी मौजूद रहे। सभी ने अरोड़ा परिवार के इस निर्णय की सराहना की और इसे समाज के लिए एक प्रेरणादायक कदम बताया। अमित पटपटिया ने जानकारी देते हुए बताया कि समर्पित युवा समिति के प्रयासों से अब तक 16 लोगों के नेत्रदान के माध्यम से 32 जरूरतमंदों को दृष्टि मिल चुकी है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।उन्होंने आमजन से अपील की कि वे भी इस पुनीत कार्य में आगे आएं और नेत्रदान के प्रति अपनी सोच को सकारात्मक बनाएं। उनका कहना है कि एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो लोगों की जिंदगी में उजाला लाया जा सकता है। इस तरह के छोटे–छोटे प्रयास समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं और मानवता की सच्ची सेवा का उदाहरण बन सकते हैं।















