अफगानिस्तान में महिलाओं के उत्पीड़न पर ICC ने कार्रवाई की

अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के बाद से महिलाओं के ऊपर कई प्रतिबंध लगाए गए हैं. तालिबान ने देश में सख्त शरिया कानून लागू कर महिलाओं की शिक्षा से लेकर उनके बाहर निकलने पर भी पाबंदी लगा दी है, जिसके खिलाफ कई पश्चिमी देश और अंतरराष्ट्रीय संगठन लगातार आवाज उठा रहे हैं. अब तालिबान पर लगाम लगाने के ICC (International Criminal Court) आगे आया है.ICC के चीफ प्रॉसिक्यूटर करीम खान ने अफगान महिलाओं और लड़कियों के उत्पीड़न को लेकर तालिबान के सुप्रीम लीडर और अफगानिस्तान के चीफ जस्टिस के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट का अनुरोध किया है. गुरुवार को जारी अपने बयान में खान ने तर्क दिया कि देश में महिलाओं के साथ होने वाले व्यवहार को ‘मानवता के विरुद्ध अपराध’ के रूप में देखा जा सकता है.

यह पहली बार है जब ICC प्रॉसिक्यूटर ने महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ सिस्टामेटिक क्राइम के इर्द-गिर्द मामला बनाया है. ये बयान अफगान के उन एक्टिविस्ट के लिए उम्मीद की किरण हैं, जिन्होंने पिछले तीन सालों में अक्सर महसूस किया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने उन्हें छोड़ दिया है. क्योंकि उनका दिन-प्रतिदिन का जीवन कठिन होता जा रहा है.

क्या है तालिबान नेताओं पर आरोप?

करीब खान ने बयान में कहा कि तालिबान के सर्वोच्च नेता हैबतुल्लाह अखुंदज़ादा और मुख्य न्यायाधीश अब्दुल हकीम हक्कानी लड़कियों, महिलाओं, LGBTQ+ समुदाय और उनके सहयोगियों के उत्पीड़न के लिए जिम्मेदार हैं. उन्होंने कहा, लिंग आधारित अपराधों, जिसमें लिंग उत्पीड़न भी शामिल है, के लिए जवाबदेही तय करने की हमारी प्रतिबद्धता एक पूर्ण प्राथमिकता बनी हुई है.”

अगर ICC इन तालिबान अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर देता है, तो तालिबान के लिए और मुसीबत बढ़ सकती है. पहले से पश्चिमी प्रतिबंधों की वजह से तालिबान को अफगानिस्तान में सरकार चलाने के कई मुश्किलें सामने आ रही हैं.

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