करोड़ों का स्वास्थ्य केंद्र बना मौत का जाल- ग्रामीणों की जान खतरे में

बांदा। ग्राम पंचायत अछरौंड़ का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), जो करोड़ों रुपये की लागत से बना था। मुख्य चिकित्साधिकारी की घोर लापरवाही के कारण खंडहर में तब्दील हो चुका है। मात्र दो-तीन कर्मचारियों के भरोसे चल रहा यह केंद्र डाक्टर, एम्बुलेंस, फार्मासिस्ट, दवाइयों और उपकरणों की भयानक कमी से जूझ रहा है,जिनकी नियुक्ति आज तक नहीं की गई । जहां साफ-सफाई के अभाव में जंगल उग आए हैं और ज्यादातर दीवारें जर्जर हो चुकी हैं। इस वजह से ग्रामीणों की जान खतरे में है, और उन्हें 20-25 किमी दूर बांदा या महंगे निजी अस्पतालों में धक्के खाने पड़ रहे हैंकृएक ऐसी स्थिति जो प्रशासन की उदासीनता की जीती-जागती मिसाल है।
ग्राम पंचायत सदस्य घासीराम निषाद ने गहरी निराशा जताते हुए कहा, “यह केंद्र जिलाधिकारी महोदया और मुख्य चिकित्साधिकारी की लापरवाही से बेकार पड़ा है। साफ-सफाई के लिये कोई नियमित रूप से पर्याप्त मात्रा में कर्मचारी न होने से ज्यादातर बिल्डिंगें बन्द पड़ी रहती हैं । जिससे स्वास्थ्य केन्द्र के स्वास्थ्य पर ही खतरा मंडरा रहा हैकृक्या गाँवों में रहनें वाले लोगों के जान की कोई कीमत नहीं ? आखिर कौन जिम्मेदारी लेगा,जो सरकार द्वारा ग्रामीणों के लिये पानी की तरह रूपया खर्च करनें के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं को मुहैया करानें में अवरोध उत्पन्न करनें का कार्य कर रहा है । जिससे लोगों में सरकार के खिलाफ गलत संदेश फैल रहा है ।”
वहीं पर मौजूद आगे आकर ग्रामीण रामदेव द्विवेदी ने चिंता व्यक्त की कि अगर सीएमओ ने शीघ्रता से संज्ञान लिया,तो अछरौंड़,उजरहेटा,मरौली,सुरौली,कपसा,मोहनपुरवा व गोयरा मुगली समेत 15-20 ग्राम पंचायतों के लोगों को बांदा के जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज के साथ प्राइवेट अस्पतालों पर निर्भरता कम होगी । ना सिर्फ निर्भरता कम होगी,बल्कि जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों भार भी कम होगा और क्षेत्रीय लोगो को सुविधा भी । इसलिये हमारा अनुरोध है कि इस स्वास्थ्य केन्द्र की व्यवस्थाओं को शीघ्रता के साथ स्वस्थ किया जाये । जिससे अधिक से अधिक लोगों को स्वास्थ्य केन्द्र का लाभ मिल सके । हाल ही में अटल आवासीय विद्यालय के बच्चों को स्वास्थ्य समस्याओं के लिए बाँदा जिला अस्पताल लेकर आना पड़ा, जहां समय पर इलाज मिलने से बड़ा हादसा टल गयाकृलेकिन कब तक ? किन्तु यदि यही अछरौंड़ का स्वास्थ्य केन्द्र पूर्ण रूप से समुचित व्यवस्थाओं के साथ चालू होता तो हो सकता है कि ऐसी समस्या ही उत्पन्न नहीं होती । विमल द्विवेदी ने गुस्से में कहा, “करोड़ों का निवेश बर्बाद हो रहा है,और जिलाधिकारी महोदया व मुख्य चिकित्साधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। बीमार बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह मौत का फंदा बन चुका हैकृक्या प्रशासन को ग्रामीणों की चीखें सुनाई नहीं देतीं?” ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्साधिकारी से तत्काल औचक निरीक्षण और 24 घंटे संचालन सुनिश्चित करने की मांग की है।स्टाफ भर्ती, एम्बुलेंस, दवाइयां और उपकरणों की कमी को दूर न किया गया, तो ग्रामीण जिला स्तर पर ज्ञापन सौंपकर प्रदर्शन करेंगे।और इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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