नवरात्रि पर सत्यम की पाठशाला में खुशियों की सौगात, बच्चों के भविष्य संवारने का संकल्प.

मुजफ्फरनगर। शहर में एक छोटीसी पहल बड़े सामाजिक बदलाव की मिसाल बनती नजर रही है। रेलवे रोड स्थित सत्यम की पाठशाला में नवरात्रि के पावन अवसर पर नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप बच्चों के बीच पहुंचीं और उन्हें उपहार वितरित कर उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रेरित किया। साईं धाम मंदिर के पास स्थित इस पाठशाला में बुधवार को खास माहौल देखने को मिला, जब मीनाक्षी स्वरूप अपनी पौत्री गौरवी के साथ बच्चों के बीच पहुंचीं। उन्होंने बच्चों के साथ समय बिताया, उनसे बातचीत की और उनके सपनों को जानने का प्रयास किया। इस दौरान बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी।पालिकाध्यक्ष ने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक किया और जीवन में आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो किसी भी व्यक्ति के जीवन को नई दिशा दे सकता है।

उन्होंने पाठशाला का निरीक्षण करते हुए वहां उपलब्ध व्यवस्थाओं को देखा और बच्चों को शिक्षण सामग्री उपहार वितरित किए। उन्होंने इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायक बताते हुए हरसंभव सहयोग का आश्वासन भी दिया। मीनाक्षी स्वरूप ने कहा कि सीमित संसाधनों में भी यदि मजबूत संकल्प और सेवा की भावना हो, तो बड़े बदलाव संभव हैं। उन्होंने इस कार्य को नि:स्वार्थ सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।सत्यम की पाठशाला के संस्थापक भारत सिंघल के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे लोग समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य कर रहे हैं। भारत सिंघल, जो विद्युत विभाग में कार्यरत हैं, अपनी ड्यूटी के बाद प्रतिदिन शाम 5 से 7 बजे तक बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि करीब तीन वर्ष पहले केवल एक बच्चे से शुरू हुई यह पहल आज 50 से अधिक बच्चों के भविष्य को संवार रही है। यहां स्मार्ट क्लास की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे बच्चों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से शिक्षा दी जा रही है।उल्लेखनीय है कि इससे पहले सितंबर 2025 में भी मीनाक्षी स्वरूप ने इस पाठशाला का दौरा कर बच्चों को शिक्षण सामग्री वितरित की थी और इस प्रयास की सराहना की थी। आज यह पाठशाला रेलवे स्टेशन के पास स्थित स्लम बस्ती के बच्चों के लिए शिक्षा की रोशनी बन चुकी है। यहां पढ़ने वाले कई बच्चे अब निजी विद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जबकि कुछ बच्चे कौशल विकास के तहत विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं। सत्यम की पाठशाला केवल शिक्षा का केंद्र बन चुकी है, बल्कि यह समाज में बदलाव और उम्मीद की एक मजबूत किरण भी साबित हो रही है।

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