गंगा-सोलानी नदी उफान पर, शुकतीर्थ व आसपास के गांवों में बाढ़ का संकट

मुजफ्फरनगर। मोरना क्षेत्र के शिवालिक पहाड़ी इलाकों में हो रही लगातार बारिश ने हालात बिगाड़ दिए हैं। गंगा और सोलानी नदी उफान पर हैं और पानी किनारों से बाहर आकर शुकतीर्थ व आसपास के खादर क्षेत्र में फैल गया है। इस बाढ़ से दर्जनों गांवों का संपर्क पूरी तरह कट चुका है, जिससे ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। लोग प्रशासन से त्वरित मदद की मांग कर रहे हैं।

शुकतीर्थ स्थित गंगा पुल में जलकुंभियों के फंसने से पानी का दबाव खतरनाक स्तर तक बढ़ गया है। पुल के टूटने का खतरा मंडरा रहा है, जबकि यह पुल खादर क्षेत्र का मुख्य संपर्क मार्ग है। इसके जरिए बिजनौर जिले के कई गांवों के लोग रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए शुकतीर्थ आते हैं। पुल बंद होने से इन गांवों की सप्लाई और आवाजाही पूरी तरह प्रभावित है।

बाढ़ की चपेट में आने से इंछावाला, पुरोषोत्तमपुर, भगवतीपुर, रतनपुर, लुकाधड़ी, हाजीपुर बरामदा, शाहजहांपुर, शिवपुरी, डूंगरपुर, गोवर्धनपुर और सुल्तानपुर समेत कई गांवों का शुकतीर्थ से संपर्क टूट गया है। ग्रामीणों ने बताया कि वे आठ से नौ किलोमीटर तक ट्रैक्टर-ट्रॉली की बड़ी ट्यूब का सहारा लेकर तैरकर गांव या डेरों तक पहुंच रहे हैं। नाव या बोट की व्यवस्था होने पर फंसे परिवारों को सुरक्षित निकाला जा सकता है, लेकिन अभी तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

स्थानीय किसानों का कहना है कि बाढ़ के पानी के खेतों में भर जाने से उनकी फसलें पूरी तरह बर्बाद होने की कगार पर हैं। इससे उन्हें भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा। कई किसानों ने प्रशासन से जल्द जलनिकासी और राहत सामग्री मुहैया कराने की गुहार लगाई है।

तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों ने शुकतीर्थ में बने पुल को संकरा और गहराई में निर्मित बताते हुए नया, ऊंचा और चौड़ा पुल बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा पुल बरसात के दिनों में खतरे का कारण बन जाता है। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो भविष्य में बड़े हादसे की आशंका बनी रहेगी।

उधर, खाईखेड़ी शुगर मिल द्वारा लगाई गई मशीन से जलकुंभियों को हटाने का कार्य तेजी से जारी है। मौके पर मौजूद मिल के कर्मचारी किसानों और ग्रामीणों की हरसंभव मदद का आश्वासन दे रहे हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों का मानना है कि केवल जलकुंभियां हटाने से समस्या का हल नहीं होगा, बल्कि स्थायी समाधान के लिए पुल का विस्तार और ऊंचाई बढ़ाने के साथ-साथ बाढ़ प्रबंधन की ठोस योजना बनानी होगी।

मौजूदा हालात में यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा और नदियों का जलस्तर और बढ़ा, तो जनहानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को फौरन नाव, राहत सामग्री और मेडिकल टीम की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके और संकट की इस घड़ी में उनकी मदद की जा सके।

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