बांदा। जिलाधिकारी जे.रीभा की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला औद्यानिक मिशन समिति की बैठक आयोजित की गयी। बैठक में जिलाधिकारी ने एकीकृत बागवानी विकास मिशन की समीक्षा करते हुए बागवानी क्षेत्र विस्तार एवं मसाला क्षेत्र विस्तार की समीक्षा करते हुए बागवानी एवं मसाला के लिए विस्तार हेतु एरिया चिन्हित करते हुए उत्पादन बढाने के लिए किसानों को प्रशिक्षित किया जाए। बैठक में बताया गया कि बागवानी क्षेत्र के अन्तर्गत आंवला, करौंदा, पपीता में लागत 45 हजार का 40 प्रतिशत अनुदान प्रति हे0 18 हजार रूपये दिया जाता है। इसी प्रकार मसाला क्षेत्र में प्याज, लहसुन की खेती में लागत रू0 50 हजार में 40 प्रतिशत प्रति हे0 रू0 20 हजार का अनुदान दिया जाता है। उन्होंने शंकर साक भाजी खेती हेतु डीसी मनरेगा से समन्वय करते हुए नर्सरी बनाये जाने के निर्देश दिये। जैविक खेती हेतु 5 हे0 में लक्ष्य है, जिसमें लागत 3750 रूपये का 40 प्रतिशत प्रति हे0 अनुदान 1500 रूपये दिया जाता है। सब्जियों के लिए मचान, घेराबन्दी (तारबाडी) में लागत 03 लाख का प्रति एक हजार रनिंग मीटर में 50 प्रतिशत का अनुदान अनुमन्य है। उन्होंने छोटे किसानों को सब्जी खेती करने वालों को घेराबन्दी अनुदान दिये जाने के निर्देश दिये।
उन्होंने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के अन्तर्गत खाद्य प्रसंस्करण में भारत सरकार द्वारा किसानों, उद्यमियों को स्वरोजगार प्रदान करने के लिए किसान/उद्यमी द्वारा खाद्य पदार्थ से सम्बन्धित उद्योग स्थापित करने पर 35 प्रतिशत अधिकतम 10 लाख की सब्सिडी ले सकते हैं, जिसके अन्तर्गत तेल स्पेलर, फ्लोर मिल, राइस मिल, दाल मिल, दूध डेरी उत्पाद एवं अन्य 45 प्रसंस्करण उद्योग सामिल हैं। जिलाधिकारी ने पर ड्राप मोर क्राप माइक्रो एरीग्रेशन के अन्तर्गत ड्रिप एवं मिनी स्प्रिंकलर हेतु प्राथमिकता पर किसानों को दिलाये जाने के निर्देश दिये।बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अजय कुमार पाण्डेय, उप निदेशक कृषि, जिला उद्यान अधिकारी एवं सम्बन्धित विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहे।















