मुज़फ्फरनगर में किसानों का प्रदर्शन, एमएसपी ,और राहत पैकेज की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

मुज़फ्फरनगर में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के आह्वान पर भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के नेतृत्व में किसानों ने अपनी ज्वलंत समस्याओं को लेकर जोरदार आवाज उठाई। युवा महानगर अध्यक्ष वसीम खान के नेतृत्व में किसानों ने महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम ज्ञापन सौंपकर केंद्र और राज्य सरकारों पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान और संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे।कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष अक्षय त्यागी ने किसानों की समस्याओं को विस्तार से रखते हुए कहा कि सरकार द्वारा गेहूं और सरसों की फसलों की एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित नहीं की जा रही है। मंडियों में किसानों को विभिन्न नियमों और प्रक्रियाओं के नाम पर परेशान किया जा रहा है, जिससे उन्हें अपनी उपज बेचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने हरियाणा सरकार द्वारा लागू की गई जटिल प्रक्रियाओं की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें तुरंत वापस लेने की मांग की।

उन्होंने यह भी कहा कि आलू समेत कई अन्य फसलों के दाम लगातार गिर रहे हैं, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो गई है। किसान अपनी फसलों की लागत तक नहीं निकाल पा रहा है, जिससे उसके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ऐसे हालात में सरकार को तुरंत राहत पैकेज घोषित करना चाहिए और फसलों की लाभकारी कीमत सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि किसानों को उनका उचित हक मिल सके।ज्ञापन में भारत-अमेरिका के प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर भी चिंता जताई गई। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि इस समझौते में कृषि, डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्र को शामिल किया गया, तो इसका सीधा नुकसान देश के किसानों को उठाना पड़ेगा। इससे विदेशी उत्पादों की आमद बढ़ेगी और घरेलू किसानों की प्रतिस्पर्धा क्षमता प्रभावित होगी। किसानों ने सरकार से मांग की कि इस तरह के किसी भी समझौते में किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा जाए।

इसके अलावा किसान नेताओं ने किसान आंदोलनों के दौरान दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लेने की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज किए गए केस उनके अधिकारों का हनन हैं और इन्हें तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए।कार्यक्रम के अंत में किसान नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो देशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा। इस दौरान गयूर मलिक, हाजी असद खान, जाहिद चौधरी, इमरान राणा, अफजल सिद्दीकी, जावेद बाग, अंजार राणा सहित कई कार्यकर्ता और किसान उपस्थित रहे।

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