फडणवीस सरकार ने जांच के लिए SIT गठित की

महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के सेंदूरसानी गांव में सामने आए 27,397 फर्जी जन्म पंजीकरण के सनसनीखेज मामले ने प्रशासन और सरकार दोनों को सकते में डाल दिया है। हैरानी की बात यह है कि जिस गांव में यह कथित घोटाला हुआ, वहां की कुल आबादी महज 1,394 है, जबकि सितंबर से नवंबर 2025 के बीच केवल तीन महीनों में ही हजारों जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। इस गंभीर मामले को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) के गठन का फैसला लिया है।

फडणवीस सरकार द्वारा गठित SIT की कमान यशस्वी यादव, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर) को सौंपी गई है। उनके साथ जांच दल में डॉ. बबीता कमलापुरकर, संयुक्त निबंधक (जन्म एवं मृत्यु), महाराष्ट्र और डॉ. सुभाष ढोले, जिला स्वास्थ्य अधिकारी, यवतमाल को शामिल किया गया है। सरकार ने SIT को निर्देश दिए हैं कि वह 100 दिनों के भीतर इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपे।

जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि इतने बड़े पैमाने पर फर्जी जन्म पंजीकरण कैसे किए गए, इसमें किन अधिकारियों, कर्मचारियों या बाहरी तत्वों की भूमिका रही और क्या इस फर्जीवाड़े का इस्तेमाल नागरिकता, पहचान पत्र, पासपोर्ट, सरकारी योजनाओं या किसी संगठित अपराध के लिए किया गया। यह भी जांच का अहम बिंदु होगा कि डिजिटल सिस्टम और सरकारी रजिस्टरों में इस हेराफेरी को कैसे अंजाम दिया गया।उल्लेखनीय है कि इस घोटाले का खुलासा पिछले सप्ताह हुआ था, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया। इससे पहले भाजपा नेता किरीट सोमैया ने सेंदूरसानी गांव में बड़े स्तर पर जन्म प्रमाण पत्र घोटाले का आरोप लगाते हुए अरनी तहसील कार्यालय और स्थानीय पुलिस थाने का दौरा किया था। अब SIT की जांच से उम्मीद की जा रही है कि इस बड़े फर्जीवाड़े के पीछे छिपे पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

सोमैया ने बताया था सबसे बड़ा बर्थ सर्टिफिकेट स्कैम

उन्होंने इसे भारत का सबसे बड़ा बर्थ सर्टिफिकेट स्कैम बताया और दावा किया कि यह एक इंटरस्टेट ऑपरेशन था, जिसके इंटरनेशनल नतीजे हो सकते हैं. उनके मुताबिक, यह फ्रॉड ग्राम पंचायत कंप्यूटर टर्मिनल, OTP-बेस्ड लॉगिन और ईमेल क्रेडेंशियल का गलत इस्तेमाल करके किया गया था, जो क्लर्क की गलती के बजाय एक एडवांस्ड साइबर-इनेबल्ड रैकेट की ओर इशारा करता है.सोमैया ने दावा किया कि ज्यादातर बेनिफिशियरी महाराष्ट्र के नहीं हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआती जांच में पता चले कई नाम पश्चिम बंगाल, उत्तर भारत और बांग्लादेश से जुड़े हैं.इससे भी ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि सोमैया ने आरोप लगाया कि 27,397 रजिस्ट्रेशन में से ज्यादातर 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के नाम पर किए गए, जो देर से जन्म रजिस्ट्रेशन के नियमों का साफ उल्लंघन है. उन्होंने कहा, ये नए जन्मे बच्चे नहीं हैं. ये बड़े लोग हैं जिन्हें कागज पर बनावटी तरीके से पैदा किया गया.

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