फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी पर ED का शिकंजा, NMC इंस्पेक्शन में फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप

हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में बड़ा खुलासा सामने आया है। जांच एजेंसी को ऐसे अहम सबूत मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से जुड़ी इंस्पेक्शन और मेडिकल कॉलेजों को दी जाने वाली अनुमति की प्रक्रिया को कथित तौर पर फर्जी तरीकों से मैनेज किया जाता था। यह मामला देश की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

ED की जांच में सामने आया है कि पीजी सीटों की मंजूरी या रद्द किए जाने से जुड़ी जानकारी संबंधित संस्थानों को पहले ही मिल जाती थी। इतना ही नहीं, NMC की इंस्पेक्शन की तारीखें भी कथित रूप से पहले से तय कर ली जाती थीं, ताकि कॉलेज प्रबंधन निरीक्षण के दौरान सभी व्यवस्थाएं कागजों पर सही दिखा सके। जांच में यह भी पाया गया कि इंस्पेक्शन के समय फर्जी डॉक्टरों और फर्जी मरीजों को दिखाकर नियमों का पालन होने का भ्रम पैदा किया जाता था।

सूत्रों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान अस्पतालों में अस्थायी तौर पर डॉक्टरों की तैनाती दिखाई जाती थी और मरीजों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर पेश की जाती थी, ताकि आवश्यक मानकों को पूरा किया जा सके। इन कथित अनियमितताओं के जरिए पीजी सीटों की मंजूरी हासिल करने या रद्द होने से बचने की कोशिश की जाती थी।ED ने इस मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी नेशनल मेडिकल कमीशन, दिल्ली पुलिस, आयकर विभाग सहित अन्य संबंधित जांच एजेंसियों को भेज दी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और खुलासे हो सकते हैं और संबंधित लोगों से पूछताछ का दायरा भी बढ़ सकता है।यह मामला केवल एक यूनिवर्सिटी तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि जांच एजेंसियां यह भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं यह एक संगठित नेटवर्क तो नहीं, जो मेडिकल कॉलेजों की मान्यता और सीटों की मंजूरी की प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा हो। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो इसका असर देशभर की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।

पैसों की हेराफरी आई सामने

दिल्ली में हुए आतंकी हमले की जांच में भी यह मामला अहम माना जा रहा है. हमले का आत्मघाती आतंकी उमर नबी, जो Al Falah यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर था, के अलावा गिरफ्तार आरोपी मुज़म्मिल का भी यूनिवर्सिटी से संबंध रहा है.ED की जांच में रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन के ज़रिए पैसों की हेराफेरी भी सामने आई है. मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल निर्माण का काम Karkun Construction & Developers को दिया गया, जिसमें जवाद अहमद सिद्दीकी बेटे अफहम अहमद सिद्दीकी की 49% हिस्सेदारी, बेटी आफिया सिद्दीका की 49% हिस्सेदारी है, 2% एक कर्मचारी के नाम है.हॉस्टल की कैटरिंग का ठेका Amla Enterprises LLP को दिया गया, जिसमें पत्नी उस्मा अख्तर की 49%, बेटे अफहम अहमद की 49% हिस्सेदारी है. इसके अलावा आरोपी के भाई की फर्म Star Foods भी यूनिवर्सिटी को सप्लाई करती रही है.ED का कहना है कि ये सभी कंपनियां असल में जवाद अहमद सिद्दीकी के नियंत्रण में चल रही थीं, लेकिन इन्हें आयकर रिटर्न या अन्य सरकारी दस्तावेजों में नहीं दिखाया गया.

ED किन बिंदुओं पर कर रही है जांच

  • शिक्षा और चैरिटेबल संस्थानों के ज़रिए अपराध की कमाई को खपाने की कोशिश
  • चैरिटेबल फंड और ज़मीन की खरीद में गड़बड़ी
  • नियमों का उल्लंघन (NMC, UGC, NAAC से जुड़े नियम)
  • विदेशों में संपत्ति और परिवार के विदेश में बसने के संकेत
  • बेटे और बेटी की दोहरी नागरिकता से जुड़े सवाल
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