मिर्गी यानी Epilepsy का दौरा (सीजर) अचानक आने वाली एक गंभीर स्थिति होती है, जो देखने वालों के लिए बेहद डरावनी हो सकती है। अक्सर लोग घबराहट में मरीज को जबरदस्ती पकड़ लेते हैं या उसे पानी पिलाने की कोशिश करते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह दोनों ही कदम खतरनाक साबित हो सकते हैं। दौरे के दौरान मरीज का शरीर अनियंत्रित रूप से झटके लेता है, ऐसे में उसे पकड़कर रोकने से मांसपेशियों में चोट या हड्डी टूटने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, बेहोशी की हालत में पानी पिलाने से सांस की नली में पानी जा सकता है, जिससे जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है।
ऐसे समय में सबसे जरूरी है कि मरीज को सुरक्षित जगह पर लिटाया जाए और उसके आसपास की कठोर या नुकीली चीजें हटा दी जाएं, ताकि चोट से बचाव हो सके। मरीज के सिर के नीचे कोई मुलायम चीज जैसे तकिया या कपड़ा रखना चाहिए और उसे करवट (साइड पोजिशन) में लिटाना चाहिए, जिससे मुंह से निकलने वाली लार या झाग आसानी से बाहर निकल सके। दौरे के दौरान मरीज के मुंह में कुछ भी डालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे दांत या जबड़े को नुकसान पहुंच सकता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि ज्यादातर दौरे 1 से 3 मिनट के भीतर अपने आप रुक जाते हैं, इसलिए धैर्य बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि दौरा 5 मिनट से अधिक समय तक जारी रहे या मरीज को बार-बार दौरे पड़ें, तो तुरंत मेडिकल सहायता लेनी चाहिए। इसके अलावा, दौरे के बाद मरीज को आराम करने दें और पूरी तरह होश में आने तक उसके साथ रहें। सही जानकारी और समय पर दी गई प्राथमिक सहायता न केवल मरीज की जान बचा सकती है, बल्कि उसे गंभीर चोटों से भी सुरक्षित रख सकती है।















