पंजाब कांग्रेस में एक बार फिर से अंदरूनी कलह सामने आ गई है। “जिला एक, रैलियां दो” की स्थिति ने पार्टी नेतृत्व की रणनीति और समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ही जिले में कांग्रेस की दो समानांतर रैलियां आयोजित की गईं, जिनमें अलग-अलग नेताओं ने शिरकत की, लेकिन किसी ने भी दूसरे गुट के नेताओं के साथ मंच साझा नहीं किया। इससे यह साफ हो गया है कि प्रदेश इकाई में गुटबाजी अभी भी चरम पर है। पार्टी हाईकमान द्वारा कई बार एकजुटता के संदेश दिए जाने के बावजूद स्थानीय स्तर पर तालमेल की कमी चिंता का विषय बनी हुई है। चुनावी माहौल में इस तरह की खींचतान कांग्रेस की स्थिति को और कमजोर कर सकती है।















