राष्ट्रीय जनता दल में तेजस्वी यादव को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद लालू प्रसाद यादव के परिवार के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। जहां एक ओर उनकी बहन मीसा भारती ने तेजस्वी को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी और इसे पार्टी के भविष्य के लिए अहम कदम बताया, वहीं बड़े भाई तेज प्रताप यादव और बहन रोहिणी आचार्य के बयानों ने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है।तेज प्रताप यादव ने तेजस्वी यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह एक बड़ी जिम्मेदारी है और उन्हें इसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाना चाहिए। हालांकि उनके बयान में समर्थन के साथ-साथ एक तरह की नसीहत भी साफ दिखाई दी। तेज प्रताप ने कहा कि पार्टी की विचारधारा, कार्यकर्ताओं और आम जनता की अपेक्षाओं को ध्यान में रखकर ही कोई भी पद सार्थक होता है।
तेज प्रताप यादव ने रोहिणी आचार्य के उस बयान का भी समर्थन किया, जिसमें उन्होंने इशारों-इशारों में नेतृत्व को लेकर सवाल उठाए थे। रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर लिखे अपने संदेश में ‘कठपुतली’ शब्द का प्रयोग किया था, जिसे कई लोग तेजस्वी यादव के नेतृत्व से जोड़कर देख रहे हैं। तेज प्रताप ने इस पर कहा कि रोहिणी ने जो कहा है, उस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए और पार्टी को आत्ममंथन करने की जरूरत है।दूसरी ओर मीसा भारती ने तेजस्वी यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि तेजस्वी युवा हैं, अनुभवी हैं और बिहार की राजनीति को अच्छी तरह समझते हैं। मीसा के अनुसार यह फैसला पार्टी को नई ऊर्जा देगा और आने वाले चुनावों में राजद को मजबूती प्रदान करेगा।
राजद के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि यह मतभेद केवल पारिवारिक नहीं बल्कि पार्टी की रणनीति और नेतृत्व शैली को लेकर भी हैं। तेजस्वी यादव को लंबे समय से पार्टी का चेहरा माना जा रहा है, लेकिन परिवार के भीतर से उठ रही असहमत आवाजें यह संकेत देती हैं कि सब कुछ पूरी तरह सहज नहीं है।तेजस्वी यादव की चुप्पी भी इन बयानों के बाद चर्चा का विषय बनी हुई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह इन आलोचनाओं और अपेक्षाओं के बीच पार्टी को किस दिशा में ले जाते हैं और क्या राजद के भीतर यह मतभेद आगे चलकर किसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का रूप लेते हैं।















