संगम स्नान विवाद में कूदे साधु-संत. शंकराचार्य की जंग में देवकीनंदन-अनिरुद्धाचार्य-रामदेव

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में संगम तट पर चल रहे माघ मेले के दौरान ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़ा विवाद अचानक सुर्खियों में आ गया है। इस विवाद ने तब और तूल पकड़ लिया, जब जगद्गुरु रामभद्राचार्य के साथ उनकी तीखी बहस सार्वजनिक मंच पर सामने आई। दोनों संतों के बीच हुई इस वैचारिक टकराव ने मेले की आध्यात्मिक शांति के बीच हलचल पैदा कर दी है।

बताया जा रहा है कि बहस के दौरान रामभद्राचार्य ने शंकराचार्य पद, उसकी परंपरा और शास्त्रीय मान्यताओं को लेकर कड़े सवाल उठाए। इसी क्रम में उन्होंने यह टिप्पणी भी की कि “शंकराचार्य में कौन-सी संधि है, यह भी नहीं पता,” जिससे माहौल और गरमा गया। इस बयान को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों ने अपमानजनक बताया, जबकि रामभद्राचार्य के अनुयायियों का कहना है कि यह टिप्पणी शास्त्रीय विमर्श के संदर्भ में थी।

माघ मेले जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में दो प्रमुख संतों के बीच इस तरह का सार्वजनिक विवाद होना श्रद्धालुओं के लिए चौंकाने वाला रहा। संगम क्षेत्र में मौजूद साधु-संतों और श्रद्धालुओं के बीच इस मुद्दे पर चर्चाएं तेज हो गईं। कुछ संतों ने इसे विचारों का टकराव बताते हुए शांत रहने की अपील की, तो कुछ ने इसे सनातन परंपराओं की आंतरिक बहस करार दिया।स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पहले भी अपने बयानों और सामाजिक-धार्मिक मुद्दों पर मुखर रुख के कारण चर्चा में रहे हैं। वहीं रामभद्राचार्य भी अपने तीखे वक्तव्यों और स्पष्ट विचारों के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में दोनों के बीच हुई यह बहस केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि व्यापक धार्मिक विमर्श के रूप में देखी जा रही है।फिलहाल माघ मेला प्रशासन और संत समाज इस विवाद को शांत करने की कोशिश में जुटा है, ताकि मेले की गरिमा बनी रहे। लेकिन यह साफ है कि संगम तट पर हुआ यह टकराव आने वाले दिनों में भी धार्मिक और वैचारिक चर्चाओं का विषय बना रहेगा।

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