संसद चलो मार्च’ के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी को तमाम विपक्षी सियासी दलों का जोरदार समर्थन मिल रहा है। समाजवादी पार्टी (SP) की नेता डिंपल यादव और आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल के बाद अब लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस लीडर राहुल गांधी ने भी छात्रों की आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है।
मल्लिकार्जुन खरगे भी थे धरने में
राहुल गांधी मंगलवार की शाम करीब 3 बजकर 40 मिनट पर अपने सांसदों के साथ प्रधानमंत्री आवास के बाहर पहुंचे और पीएम मोदी का इस्तीफा मांगते हुए धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनके साथ उनकी बहन और सांसद प्रियंका गांधी के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी थे। पूरे 3 घंटे तक प्रधानमंत्री आवास के बाहर हाई वोल्टेज ड्रामा चला। पुलिस के जवान राहुल गांधी को हटाने की कोशिश करते रहे, लेकिन उन्होंने हटने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद करीब 6 बजकर 30 मिनट पर पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित कई कांग्रेस सांसदों को डिटेन कर लिया।
#WATCH | Congress MP Priyanka Gandhi Vadra, protesting with opposition leaders and workers at Lok Kalyan Marg, detained by Delhi Police. pic.twitter.com/EacXvozjH0
— ANI (@ANI) July 21, 2026
हर भारतीय परिवार पर हमला
इससे पहले राहुल गांधी प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गए थे। उनके साथ प्रियंका गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस के कई सांसद धरने पर बैठ गए थे। उन्होंने जनता से भी वहां आकर धरने में शामिल होने की अपील की थी। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा था कि छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है।
#WATCH | Lok Sabha LoP Rahul Gandhi, protesting with Opposition leaders and workers at Lok Kalyan Marg, detained by Delhi Police. pic.twitter.com/mkctEgsybl
— ANI (@ANI) July 21, 2026
हमारे धरने में शामिल हों
लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी को लगता है कि वो बिना जवाब दिए, बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे-नहीं कर पाएंगे। इस बार तो बिल्कुल नहीं। उन्होंने कहा था कि मैं हर उस देशभक्त भारतीय से अपील करता हूं जो मानता है कि हमारे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए-प्रधानमंत्री आवास के सामने हमारे धरने में शामिल हों।
संविधान ही आपका मालिक
इससे पहले राहुल ने ट्वीट कर कहा था कि भारत के छात्रों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। शांतिपूर्ण विरोध एक अटूट और मौलिक अधिकार है। भारत के निर्दोष छात्रों पर हमला करने के आदेशों का आंखें बंद करके पालन करने वाले हर पुलिस अधिकारी और सरकारी कर्मचारी ये बात ध्यान रखें। संविधान ही आपका मालिक है। सत्ता हमेशा के लिए नहीं रहती। जवाबदेही जरूर तय की जाएगी।























































