रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वियतनाम की अपनी आधिकारिक यात्रा पर है. मंगलवार (19 मई) को उन्होंने राजधानी हनोई में वियतनाम के राष्ट्रपिता हो ची मिन्ह (Ho Chi Minh ) को उनकी 136वीं जयंती के अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित की. इस दौरान उन्होंने समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित की. इस दौरान उन्होंने कहा कि हो ची मिन्ह का विजन, नेतृत्व और राष्ट्रीय स्वतंत्रता और वैश्विक एकजुटता के प्रति उनका अटूट समर्पण आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करता है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत-वियतनाम की मित्रता साझा मूल्यों, आपसी सम्मान और लंबे समय से चले आ रहे सहयोग पर आधारित है.राजनाथ सिंह ने मंगलवार को हनोई में वियतनाम के रक्षा मंत्री फान वान जियांग (Phan Van Giang ) के साथ एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक की. इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की और समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग, सैन्य प्रशिक्षण और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की.
रक्षा संबंधों को मजबूत करने पर जोर
बैठक के दौरान दोनों देशों ने रक्षा संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया, खासतौर पर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जनरल फान वान जियांग ने संयुक्त रूप से वियतनाम के एयर फोर्स ऑफिसर्स कॉलेज में स्थापित नए लैंग्वेज लैब का उद्घाटन भी किया.इसके अलावा दोनों देशों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक समझौता ज्ञापन (MoU) किया गया. इसे भारत-वियतनाम व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने वाला अहम कदम माना जा रहा है.
भारत-वियतनाम रणनीतिक साझेदारी के 10 साल
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उनका यह वियतनाम दौरा बेहद खास है, क्योंकि यह भारत-वियतनाम रणनीतिक साझेदारी के 10 साल पूरे होने के मौके पर हो रहा है. उन्होंने कहा कि यह दोनों देशों के मजबूत और गहरे रिश्तों को दिखाने वाला एक अहम पड़ाव है. उन्होंने कहा कि वियतनाम के नेताओं की हालिया भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को और ऊंचा दर्जा देते हुए स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप में अपग्रेड किया गया, जिससे भारत और वियतनाम के रिश्तों को नई मजबूती मिली है.रक्षा मंत्री ने कहा कि इस दौरे के दौरान हुई बातचीत से दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग और मजबूत होगा, साथ ही आने वाले सालों में नए क्षेत्रों में सहयोग के रास्ते भी खुलेंगे. उन्होंने कहा कि भारत और वियतनाम इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे.























































