मुजफ्फरनगर में RDF जलाने को लेकर टकराव: प्रशासन बना मध्यस्थ, किसान–उद्योगपतियों में तीखी बहस के बाद निकला अस्थायी समाधान

मुजफ्फरनगर जनपद में फैक्ट्रियों में RDF जलाने और दूसरे राज्यों से आ रहे गीले कूड़े के दहन से फैल रहे प्रदूषण को लेकर चल रहा विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। बढ़ते तनाव और टकराव के बीच प्रशासन ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए किसान नेताओं, ग्रामीणों और उद्योगपतियों के बीच मध्यस्थ की भूमिका संभाली। इसी क्रम में आयोजित लगभग ढाई घंटे चली बैठक में पहली बार दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर वार्ता कराई गई, ताकि समस्या का ऐसा समाधान निकाला जा सके जिससे ग्रामीणों को प्रदूषण से राहत मिले और उद्योगों का संचालन भी बाधित न हो।

बैठक के दौरान प्रदूषण से प्रभावित ग्रामीणों और किसान नेताओं ने RDF और गीले कूड़े के जलने से हो रही गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि फैक्ट्रियों से निकलने वाली काली राख, धूल-मिट्टी और दूषित पानी ने खेती, पशुपालन और आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। किसान नेता राकेश टिकैत ने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी हालत में RDF को जलने नहीं दिया जाएगा और यदि स्थिति नहीं सुधरी तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

वहीं दूसरी ओर उद्योगपति भी अपनी बात पर अड़े नजर आए। पेपर मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज अग्रवाल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उद्योग पहले ही कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं और लगातार दबाव में काम करना संभव नहीं है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो सभी उद्योग बंद कर अपनी चाबियां जिलाधिकारी को सौंप दी जाएंगी। उद्योगपतियों का तर्क था कि उत्पादन रुकने से हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा और जिले की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान होगा।

दोनों पक्षों के बीच बढ़ती खींचतान को देखते हुए प्रशासन ने संयमित रुख अपनाते हुए बीच का रास्ता निकालने पर जोर दिया। अधिकारियों ने दोनों पक्षों से अपील की कि टकराव की बजाय संवाद के जरिए समाधान खोजा जाए। लंबी चर्चा के बाद एक अस्थायी सहमति बनी, जिसके तहत ग्रामीणों और किसान नेता राकेश टिकैत ने फैक्ट्री मालिकों को अपनी व्यवस्थाएं सुधारने के लिए एक महीने का समय दिया है।

इस अवधि में फैक्ट्री मालिकों को कई ठोस कदम उठाने होंगे। इनमें फैक्ट्री परिसरों के बाहर धूल-मिट्टी को खत्म करने के लिए टाइल्स लगाना, काली राख के उत्सर्जन को कम करने के उपाय करना और पानी को शुद्ध करने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू करना शामिल है। प्रशासन ने भी इन सुधार कार्यों की निगरानी करने का आश्वासन दिया है।

बैठक के अंत में यह तय हुआ कि अगली समीक्षा बैठक 2 फरवरी को कलेक्ट्रेट के सभागार में आयोजित की जाएगी, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में अब तक की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। फिलहाल प्रशासन की मध्यस्थता से टकराव थमता नजर आ रहा है, लेकिन आने वाला महीना यह तय करेगा कि यह सहमति स्थायी समाधान की ओर बढ़ती है या फिर विवाद दोबारा उग्र रूप लेता है।

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