यूक्रेन में प्रलय जैसे हालात, जेलेंस्की बेहद लाचार,

अमेरिकी कवच हट चुका है तो यूरोप में यूक्रेन की मदद को लेकर मतभेद है. ऐसे में जेलेंस्की बेहद लाचार नजर आते हैं और पुतिन ने इसका फायदा उठाने की तैयारी कर ली है. पुतिन का टारगेट यूक्रेन की पोर्ट सिटी ओडेसा है.बीते 48 घंटे से रूसी सेना यहां हमले कर रही है. पुतिन हर हालात में इस शहर पर कब्जा चाहते हैं. ओडेसा पर कब्जा होते ही रूस दक्षिणी यूरोप के दरवाजे तक पहुंच जाएगा. जिसके बाद पुतिन अपना यूरोप प्लान एक्टिव कर सकते हैं.

दक्षिणी यूक्रेन में प्रलय जैसे हालात हैं. इसकी वजह रूसी बारूद है. इस बारूद का प्राइमरी टारगेट है यूक्रेन की एकमात्र पोर्ट सिटी ओडेसा. बीते 48 घंटे से ओडेसा रूसी ड्रोन और मिसाइलों के हमले से दहल रहा है. हर एक शहर में धमाकों की गूंज सुनाई दे रही है. 2 दिन से ओडेसा पर रूस के हमले जारी हैं. पुतिन सेना 150 से ज्यादा ड्रोन हमले कर चुकी है. रूस के इन ड्रोन्स का प्रमुख टारगेट रिहायशी इमारतें, हथियार डिपो और फैक्ट्रियां हैं. हमले में अबतक 7 इमारतें और 2 स्कूल तबाह हो चुके हैं. वहीं 3 हथियार डिपो और 1 फैक्ट्री भी रूस ने नष्ट कर दी है.

धू-धूकर जल रहे ओडेसा के कई इलाके

रूसी ड्रोन हमलों से ओडेसा के कई इलाके धू-धूकर जल रहे हैं. रिहायशी इमारतें भीषण आग की चपेट में हैं. हालात ऐसे हैं कि ओडेसा में फायर फाइटर्स की संख्या कम पड़ रही है. रात दिन फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और जवान आग बुझाने के काम में लगे हैं. ओडेसा के पावर प्लांट और एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भी रूस भीषण हमले कर रहा है. रूसी तबाही की चपेट में आकर ओडेसा के एक बड़े हिस्से की एनर्जी सप्लाई ठप हो चुकी है. कई हिस्सों में ब्लैकआउट है. ओडेसा में रूस करीब 6 बिजली संयंत्र तबाह कर चुका है. कई किमी की बिजली लाइनें तबाह हो चुकी हैं. करीब 7000 घरों की बिजली गुल है.

दावा है कि पुतिन ने इन हमलों की प्लानिंग उसी दिन कर ली थी जब ओवल ऑफिस में ट्रंप और जेलेंस्की के बीच जबरदस्त तकरार हुई थी. पुतिन को इंतजार सिर्फ इस तकरार के बढ़ने का था, जो लंदन में हुई यूरोपीय देशों की मीटिंग के बाद हुआ. लंदन मीटिंग के बाद आगबबूला ट्रंप यूक्रेन की हथियार सप्लाई पूरी तरह से बंद कर चुके हैं. ऐसे में पुतिन ने ओडेसा पर कब्जे का प्लान एक्टिव कर दिया है. रूस की कोशिश ओडेसा का हाल मारियोपुल जैसा करने की है ताकि यूक्रेन की इकलौती पोर्ट सिटी पर कब्जा किया जा सके लेकिन ये पुतिन के प्लान महज एक छोटा सा हिस्सा है.

पुतिन का पूरा प्लान क्या है?

यूक्रेन के लुहांस्क से लेकर मेलितोपोल तक रूसी सेना का कब्जा है. अब रूस का टारगेट ओडेसा है. दरअसल, ओडेसा यूक्रेन की इकलौती पोर्ट सिटी है, जो काला सागर से लगती है. इस पर रूस के कब्जा से यूक्रेन समंदर से पूरी तरह कट जाएगा. साथ ही उत्तर-पूर्व में मौजूद लुहांस्क से लेकर दक्षिण में ओडेसा तक रूस का एक छत्र राज होगा,जो एक बफर जोन की तरह काम करेगा.

इसके बाद पुतिन का यूरोप प्लान शुरू होगा. दरअसल ओडेसा दक्षिणी यूरोप के गेटवे की तरह है. ओडेसा का एक हिस्सा सीधा मोलदोवा से लगता है जबकि दूसरे हिस्सा में बीच में ट्रांसनिस्ट्रिया है. ट्रांसनिस्ट्रिया में रूस समर्थक सरकार है. ऐसे में मोल्दोवा दोनों तरफ से रूसी सेना से घिर जाएगा. वहीं ओडेसा का दक्षिणी बॉर्डर रोमानिया से भी लगता है.

ऐसे में पुतिन एक साथ दो यूरोपीय देशों पर सीधा हमला कर सकेंगे. पुतिन की सेना को बॉर्डर के रास्ते इन देशों में घुसना बेहद आसान हो जाएगा. रूस ना सिर्फ ओडेसा पर हमले कर रहा है बल्कि उसके टारगेट पर दक्षिणी यूक्रेन के कई और शहर भी हैं, जहां फ्रंटलाइन पर मौजूद रूसी सेना बेहद आक्रामक है.

जेलेंस्की की सेना बेहद लाचार

खारकीव पर भी रूस जबरदस्त ड्रोन हमले कर रहे हैं. यहां रूस के टारगेट पर यूक्रेन सेना के वेयरहाउस और हथियार फैक्ट्रियां हैं. ट्रंप का कवच हटने के बाद पुतिन सेना दक्षिणी यूक्रेन में भीषण हमले कर रही है तो दूसरी तरफ कुर्स्क से यूक्रेन सैनिकों को खदेड़ा जा रहा है. पुतिन का टारगेट जल्द से जल्द कुर्स्क को खाली करवाना है. जेलेंस्की की सेना इस वक्त बेहद लाचार है, जिसकी वजह है अमेरिकी स्टारलिंक से मदद नहीं मिलना लेकिन अब जेलेंस्की ने इसका विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है.

जेलेंस्की जानते हैं कि ट्रंप का कवच हटने के बाद पुतिन ज्यादा से ज्यादा जमीन पर कब्जे की कोशिश में है. अब पुतिन को रोकने का एकमात्र रास्ता कुर्स्क पर कब्जा जमाए रखना और रूसी जमीन को दहलाना है, जो इस जंग को और ज्यादा भड़काएगा.

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