सर्दियों में स्किन पर लगाने के लिए अपनी बॉडी टाइप के अनुसार सही तेल चुनें.

सर्दियों का मौसम त्वचा की नमी तेजी से खींच लेता है। ठंडी और शुष्क हवाओं की वजह से स्किन रूखी, बेजान और खिंचाव वाली महसूस होने लगती है। ऐसे में ऑयलिंग स्किन को पोषण देने और उसे मॉइस्चराइज रखने का एक बेहतरीन तरीका है। लेकिन सिर्फ तेल लगाना काफी नहीं होता, बल्कि अपनी प्रकृति यानी बॉडी टाइप—वात, पित्त और कफ—के अनुसार तेल चुनना भी बेहद जरूरी है। आयुर्वेद के अनुसार हर व्यक्ति की स्किन अलग तरह से रिएक्ट करती है, इसलिए एक ही तेल सभी के लिए सही नहीं होता। गलत तेल का चयन स्किन पर जलन, पिंपल्स या अधिक ड्राईनेस जैसी समस्याएं भी पैदा कर सकता है।

वात प्रकृति या ड्राई स्किन वाले लोगों के लिए बादाम और तिल का तेल सबसे बेहतर माना जाता है। ये तेल त्वचा की गहराइयों तक जाकर नमी देते हैं और खिंचाव तथा फटने की समस्या को कम करते हैं। पित्त प्रकृति यानी सेंसिटिव और आसानी से जलन वाली स्किन के लिए नारियल तेल बेहद फायदेमंद होता है। इसकी ठंडक त्वचा को सुकून देती है और लालिमा या जलन से राहत पहुंचाती है। वहीं, कफ प्रकृति या ऑयली स्किन वालों के लिए सरसों और हल्के तिल के तेल का उपयोग सही माना जाता है, क्योंकि ये रक्त प्रवाह बढ़ाकर स्किन को गर्म रखते हैं और भारीपन कम करते हैं।

इस तरह अपनी प्रकृति के हिसाब से सही तेल चुनकर सर्दियों में त्वचा को न सिर्फ सुरक्षित रखा जा सकता है, बल्कि उसे मुलायम, हाइड्रेटेड और चमकदार भी बनाया जा सकता है।

ड्राई स्किन के लिए ये तेल है बेस्ट

आयुर्वेद डॉक्टर बताती हैं कि, अगर आपकी ड्राई या फ्लेकी स्किन है तो आपके लिए तिल का तेल सबसे बेहतर रहेगा. दरअसल, तिल के तेल में मौजूद फैटी एसिड और मॉइस्चराजिंग गुप पाए जाते हैं. जो त्वचा को गहराई से नमी देते हैं. इससे स्किन सॉफ्ट और मुलायम बनती है.

रेडनेस और पेची स्किन

अगर सर्दियों में किसी को स्किन पर रेडनेस, जलन या सूजन की समस्या हो गई है तो आपको बादाम या नारियल का तेल इस्तेमाल करना चाहिए. दरअसल, इन दोनों ही तेलों में माइस्चराइजिंग, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं. जो सूजन और रेडनेस को कम करने में मदद करते हैं. साथ ही बादाम तेल में विटामिन ई भी पाया जाता है, जो त्वचा की मरम्मत करता है.

इन लोगों को लगाना चाहिए सरसों का तेल

आयुर्वेद डॉक्टर कहती हैं कि, जिन लोगों की स्किन ज्यादा ड्राई नहीं होती है और सॉफ्ट बनी रहती है. उनके लिए सरसों का तेल एक अच्छा ऑप्शन है. हालांकि, इस कम मात्रा में ही लगाएं नहीं तो चिपचिपा महसूस हो सकता है.

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