मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर 23 जनवरी 2026 को जिले में ब्लैकआउट मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाएगा। यह मॉक ड्रिल नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिवस पर पूरे प्रदेश में एक साथ आयोजित की जा रही है। जिले में यह अभ्यास शाम 6 बजे आर्य समाज रोड स्थित डीएवी इंटर कॉलेज के मैदान में किया जाएगा। मॉक ड्रिल की तैयारियों को लेकर 21 जनवरी को विकास भवन सभागार में एक अहम बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया और अपनी-अपनी जिम्मेदारियों को लेकर चर्चा की गई।बैठक की अध्यक्षता करते हुए अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व गजेंद्र कुमार ने बताया कि मॉक ड्रिल का उद्देश्य किसी भी आकस्मिक या आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए प्रशासनिक तंत्र और स्वयंसेवकों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है। उन्होंने कहा कि इस अभ्यास के माध्यम से यह परखा जाएगा कि आपदा के समय विभिन्न विभागों के बीच समन्वय किस प्रकार काम करता है और प्रतिक्रिया कितनी त्वरित रहती है। मॉक ड्रिल के दौरान नगर पालिका, विद्युत विभाग, अग्निशमन सेवा, परिवहन विभाग, पुलिस, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों की स्पष्ट जिम्मेदारी तय की गई है।
बैठक में मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनुराग कुमार, एआरटीओ प्रशासन सुशील कुमार मिश्रा, नगर पालिका की ईओ प्रज्ञा सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संदीप कुमार, जिला विकास अधिकारी दिग्विजय नाथ तिवारी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी जितेंद्र गुप्ता, नायब तहसीलदार सदर हरेंद्र कुमार, गाइड कैप्टन डा. राजेश कुमारी, विवेक गोयल तथा नागरिक सुरक्षा एवं आपदा सहायक नासिर हुसैन सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।
मॉक ड्रिल से पहले आपदा मित्रों और सिविल डिफेन्स के स्वयंसेवकों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया। कलेक्ट्रेट स्थित इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में अपर जिलाधिकारी गजेंद्र कुमार और नागरिक सुरक्षा उपनियंत्रक कश्मीर सिंह ने स्वयंसेवकों को आपदा से निपटने के व्यावहारिक तरीके समझाए। उन्होंने बताया कि हवाई हमले, आग, भूकंप, बाढ़ या किसी बड़े हादसे की स्थिति में आम जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है और ऐसे समय में सिविल डिफेन्स व आपदा मित्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
प्रशिक्षण के दौरान स्वयंसेवकों को यह बताया गया कि आपात स्थिति में घबराने के बजाय संयम और सतर्कता बनाए रखना जरूरी है। खुले स्थानों से सुरक्षित जगह पर जाना, कांच और खिड़कियों से दूरी बनाए रखना, अफवाहों से बचना और केवल प्रशासन द्वारा जारी सूचना पर भरोसा करना जैसे महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। इसके साथ ही घायलों को प्राथमिक उपचार देकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के तरीकों पर भी विस्तार से जानकारी दी गई।
नागरिक सुरक्षा उपनियंत्रक कश्मीर सिंह ने कहा कि मॉक ड्रिल केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि वास्तविक आपदा के समय कार्यप्रणाली को परखने का जरिया है। प्रशिक्षण के दौरान रेस्क्यू ऑपरेशन, स्ट्रेचर का उपयोग, घायल को सुरक्षित निकालने और प्राथमिक उपचार का डेमो भी कराया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि 23 जनवरी की मॉक ड्रिल में पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, फायर ब्रिगेड, सिविल डिफेन्स और अन्य संबंधित टीमें मिलकर काम करेंगी, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
















