सिरोही जिले में रेलवे जंक्शन की मांग को लेकर पिंडवाड़ा संघर्ष समिति द्वारा सिरोही तहसीलदार को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर भाजपा जिला प्रवक्ता दीपेंद्र सिंह देवड़ा ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए आंदोलन को ओछी राजनीति करार दिया और आमजन को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि रेलवे जंक्शन या नई रेल लाइन का निर्णय किसी जनप्रतिनिधि के हाथ में नहीं होता, बल्कि रेलवे बोर्ड द्वारा तय किए गए मानकों और तकनीकी पैरामीटर्स के आधार पर ही ऐसे प्रोजेक्ट आगे बढ़ते हैं।
दीपेंद्र सिंह देवड़ा ने कहा कि सांसद लुम्बाराम चौधरी इस विषय में पहले ही स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं। पिंडवाड़ा या सरूपगंज क्षेत्र में न तो पहले कभी और न ही वर्तमान में रेलवे जंक्शन के लिए कोई भूमि चिन्हित की गई है। सिरोही–सरूपगंज रेल लाइन को लेकर सर्वे जरूर चल रहा है, लेकिन यह परियोजना व्यवहारिक है या नहीं, इसका निर्णय अभी नहीं किया जा सकता। सर्वे की रिपोर्ट और तकनीकी आकलन के बाद ही रेलवे बोर्ड अंतिम फैसला लेता है।
उन्होंने यह भी कहा कि सिरोही से पिंडवाड़ा के बीच पहले जो सर्वे हुआ था, वह तय मानकों को पूरा नहीं कर पाया, इसलिए उसे अव्यवहारिक माना गया। किसी भी बड़ी परियोजना, खासकर करीब 1500 करोड़ रुपये की लागत वाली रेल परियोजना को शुरू करने से पहले सरकार कई स्तरों पर जांच कराती है। अलग-अलग एजेंसियों से रिपोर्ट मंगाई जाती है और सभी से स्वीकृति मिलने के बाद ही मामला आगे बढ़ता है। ऐसे में बिना तथ्यों के आंदोलन करना जनता को भ्रमित करने जैसा है।
देवड़ा ने जानकारी दी कि जालोर–सिरोही क्षेत्र के सांसद लुम्बाराम चौधरी का मुख्य उद्देश्य सिरोही जिला मुख्यालय को रेलवे नेटवर्क से जोड़ना है और वे इस दिशा में लगातार प्रयासरत हैं। सांसद ने इस संबंध में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन के. बेरी को कई बार पत्र लिखकर जिले की जरूरतों से अवगत कराया है।
रेलवे मंत्रालय से प्राप्त आधिकारिक जानकारी का हवाला देते हुए देवड़ा ने बताया कि बागरा–सिरोही–पिंडवाड़ा (96 किलोमीटर) नई रेल लाइन का सर्वे पहले ही किया जा चुका है, लेकिन यात्री संख्या की कम संभावनाओं के कारण इस परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया गया। मंत्रालय के पत्र दिनांक 24 जून 2016 के अनुसार सिरोही रोड–मारवाड़ बागरा नई रेल लाइन, जिसकी अनुमानित लागत 1526.71 करोड़ रुपये थी, को अलाभकारी मानते हुए 26 अक्टूबर 2016 को स्थगित कर दिया गया था।
इन तथ्यों के आधार पर देवड़ा ने कहा कि मौजूदा हालात में इस मुद्दे पर आंदोलन का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भाजपा के वरिष्ठ नेता सिरोही को रेल सुविधा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं और आने वाले समय में पार्टी कार्यकर्ता आमजन को पूरे मामले की वास्तविक स्थिति से अवगत कराएंगे, ताकि किसी भी तरह की भ्रांति न फैले।















