22,000 करोड़ के घाटे के बीच 7 मई को Air India की बड़ी बैठक,

टाटा समूह (Tata Group) की एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया (Air India) इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है. एक तरफ कंपनी भारी वित्तीय घाटे से जूझ रही है, तो दूसरी तरफ पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी संघर्ष की वजह से ऑपरेशनल चुनौतियां बढ़ गई हैं.

इसी बीच 7 मई को मुंबई में एयर इंडिया के बोर्ड की एक अहम बैठक होने जा रही है, जिसकी अध्यक्षता टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन करेंगे. इस बोर्ड मीटिंग में लागत कम करने यानी कॉस्ट कटिंग से लेकर नए CEO का चयन, वित्तीय स्थिति की समीक्षा ,ऑपरेशनल चुनौतियां और भविष्य की रणनीति पर कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं, जिनका सीधा असर यात्रियों पर पड़ सकता है.

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी को 22,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का भारी नुकसान होने का अनुमान है. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और महंगे हवाई ईंधन (ATF) ने लागत को काफी बढ़ा दिया है, जिससे एयरलाइन की स्थिति और दबाव में आ गई है.हवाई ईंधन (ATF) की कीमतों में 1 मई को 5% से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है. लागत बढ़ने के कारण एयरलाइंस ने किराए और फ्यूल सरचार्ज बढ़ाए हैं, लेकिन ज्यादा किराया होने से यात्रियों की मांग पर भी असर पड़ रहा है.

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण एयरस्पेस बंद होने से कई इंटरनेशनल फ्लाइट्स को लंबा रूट लेना पड़ रहा है. जिससे ईंधन की खपत और खर्च दोनों में भारी इजाफा हुआ है.कंपनी ने माना है किइससे ऑपरेशन महंगा हो गया है और कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें घाटे में चल रही हैं.

कंपनी के मौजूदा सीईओ कैंपबेल विल्सन (Campbell Wilson) इस साल के अंत में अपना पद छोड़ देंगे. ऐसे में नए CEO के चयन पर भी बैठक में फैसला हो सकता है. सूत्रों के अनुसार, एयर इंडिया और सिंगापुर एयरलाइंस के साथ-साथ कुछ यूरोपीय उम्मीदवारों के नाम भी चर्चा में हैं. बोर्ड जॉइंट MD या नए CEO की नियुक्ति की संभावना पर भी विचार कर सकता है.

घाटे को कम करने के लिए एयर इंडिया ‘अनबंडलिंग मॉडल’ पर विचार कर रही है. इसके तहत फ्लाइट टिकट में मिलने वाली सुविधाएं जैसे मील्स (खाना) और बिजनेस क्लास लाउंज एक्सेस को अलग किया जा सकता है. कंपनी यात्रियों को ऐसा विकल्प देने पर विचार कर रही है जहां वे बिना मील्स के सस्ता टिकट बुक कर सकें.बिजनेस क्लास यात्रियों के लिए लाउंज की सुविधा को भी टिकट से अलग किया जा सकता है, यानी यात्री केवल तभी पेमेंट करेंगे जब वे इसका उपयोग करना चाहें.यानी यात्रियों को जरूरत के हिसाब से इन सुविधाओं के लिए अलग से पेमेंट करना पड़ सकता है. हालांकि अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है.

कंपनी पहले ही अप्रैल और मई में इंटरनेशनल फ्लाइट्स में कटौती कर चुकी है. मुनाफे में कमी और मौजूदा हालात को देखते हुए कंपनी जून और जुलाई में भी उड़ानों की संख्या कम की जा सकती है. कंपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के शेड्यूल में और कटौती करने पर मंथन कर रही है.

सिर्फ एयर इंडिया ही नहीं, बल्कि पूरी एविएशन इंडस्ट्री इस समय दबाव में है. डिगो और स्पाइसजेट जैसी एयरलाइंस ने भी सरकार से मदद की मांग की है और कहा है कि इंडस्ट्री गंभीर संकट में है और ऑपरेशन बंद करने की कगार पर है. इंटरनेशनल स्तर पर भी एयरलाइंस कंपनियां लागत कम करने के उपाय अपना रही हैं. वैश्विक स्तर पर भी एयरलाइंस लागत में कटौती कर रही हैं.यहां तक कि अमेरिका की स्पिरिट एयरलाइंस ने अपना ऑपरेशन बंद कर दिया है

इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में एशिया और यूरोप में जेट फ्यूल की कमी हो सकती है,जिसका सीधा असर टिकटों की कीमतों पर पड़ेगा. आईएटीए (IATA) के अनुसार, इससे टिकट की कीमतें और बढ़ सकती हैं.

ऐसे में एयर इंडिया की 7 मई की बैठक बेहद अहम मानी जा रही है. इसमें लिए गए फैसले न सिर्फ कंपनी का फ्यूचर तय करेंगे, बल्कि यात्रियों के खर्च और सुविधाओं पर भी सीधा असर डाल सकते हैं.

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