सऊदी अरब की सरकार ने कैबिनेट में एक अहम बदलाव के तहत फहद अल-सैफ को निवेश मंत्री नियुक्त किया है. अल-सैफ के जिम्मे सऊदी में निवेश लाना और एआई का विकास देखना है. सैफ को कैबिनेट में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बाद सबसे पावरफुल माना जा रहा है. क्योंकि हाल के दिनों में सऊदी ने निवेश पर सबसे ज्यादा फोकस किया है. मोहम्मद बिन सलमान ने इसके लिए विजन-2030 डॉक्यूमेंट भी जारी किया है.बीबीसी अरबी के मुताबिक सऊदी में वर्तमान में प्रत्येक साल 32 अरब डॉलर का निवेश बाहर से आ रहा है. 2030 तक इस संख्या को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. इसी काम के लिए सऊदी में अल-सैफ को निवेश मंत्री के तौर पर नियुक्त किया गया है.
कौन हैं फहद अल सैफ?
फहद अल सैफ की पहचान एक टेक्नोक्रेट और बैंकर के तौर पर है. शुरुआती पढ़ाई-लिखाई सऊदी से करने के बाद फहद सऊदी स्थित पेट्रोलियम और खनिज विश्वविद्यालय से सूचना प्रणाली में स्नातक की उपाधि प्राप्त की. इसके बाद वे बतौर टेक्नोक्रेट कॉर्पोरेट कंपनी में शामिल हो गए.सऊदी सरकार के मुताबिक फहद अल-सैफ को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों और सरकारी संस्थानों में बैंकर के रूप में 26 वर्षों से अधिक का अनुभव है. 2021 में उन्होंने सऊदी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रोजेक्ट संभाला था.
फहद अल-सैफ की नियुक्ति क्यों?
1. अल-सैफ राजनीति से नहीं आते हैं. उनकी पहचान एक गैर-राजनेता की है. अमेरिका जैसे देशों में गैर-राजनेता को बड़ा पद देने का प्रयोग सफल रहा है. वर्तमान डोनाल्ड ट्रंप शासन में भी कई ऐसे लोग बड़े पदों पर नियुक्त हैं, जो राजनीति से ताल्लुकात नहीं रखते हैं.
2. सऊदी के लिए विजन-2030 काफी अहम है. यह मोहम्मद बिन सलमान का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है. अगर यह प्रोजेक्ट फैल होता है, तो एमबीएस पर सवाल उठेंगे. उनके आगे की राह कठिन हो जाएगी. एमबीएस इसको लेकर रिस्क मोड में नहीं हैं.
3. मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि पैसे की कमी की वजह से लाल सागर पर 81 लक्जरी रिसॉर्ट्स का निर्माण ठप हो गया है. वर्तमान में जो स्थिति है, उसमें लाल सागर की काफी अहमियत है. फहद की नियुक्ति को इसलिए भी अहम माना जा रहा है.















