मुजफ्फरनगर में जिलाधिकारी उमेश मिश्रा के आदेश पर बाल श्रम के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया गया। सहायक श्रम आयुक्त देवेश सिंह के निर्देशन में गठित संयुक्त टीम ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में छापेमारी कर 8 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया और 6 सेवायोजकों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की। अभियान में श्रम प्रवर्तन अधिकारी बालेश्वर सिंह, शालू राणा, थाना एएचटी प्रभारी जय सिंह भाटी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, चाइल्ड हेल्पलाइन टीम तथा अन्य सहयोगी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी रही।
संयुक्त टीम ने साईं धाम जानसठ रोड, ट्रांसपोर्ट नगर, भोपा रोड, रोडवेज बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन सहित कई स्थानों पर औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान विभिन्न प्रतिष्ठानों में कम उम्र के बच्चों से काम कराए जाने के मामले सामने आए, जिसके बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए बच्चों को मुक्त कराया गया। अधिकारियों ने संबंधित सेवायोजकों के विरुद्ध बाल श्रम कानून के तहत मुकदमे दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।सहायक श्रम आयुक्त देवेश सिंह ने स्पष्ट कहा कि 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी बालक से प्रतिष्ठानों पर कार्य कराना पूर्णतः प्रतिबंधित है। उन्होंने बताया कि बच्चों का पहला अधिकार शिक्षा है और यदि कोई भी सेवायोजक बाल श्रम कराते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने समाज से अपील की कि बच्चों को काम पर लगाने के बजाय उन्हें विद्यालय भेजने में सहयोग करें।
अभियान में सहयोग कर रही संस्था Just Rights for Children के प्रोजेक्ट लीडर गजेंद्र सिंह ने कहा कि संस्था हमेशा बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए प्रशासन के साथ खड़ी रहती है। उन्होंने लोगों से उत्तर प्रदेश सरकार के “स्कूल चलो अभियान” को सफल बनाने की अपील करते हुए कहा कि बच्चों को श्रम में धकेलना उनके भविष्य के साथ अन्याय है।कार्रवाई को सफल बनाने में थाना एएचटी टीम के सब इंस्पेक्टर मनमोहन सिंह, महिला कांस्टेबल रूबी, हेड कांस्टेबल अमरजीत सिंह, चाइल्ड हेल्पलाइन से सचिन और सागर तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पैरालीगल वालंटियर गौरव मलिक सहित कई लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जनपद में बाल श्रम के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।















