बांदा। एक मां की सूनी गोद फिर से भर गई। ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के तहत बांदा पुलिस ने वो कर दिखाया जिसे चमत्कार कहते हैं। खुरहंड में भटकता मिला 12 साल का मानसिक रूप से कमजोर मासूम आखिर 26 मई को अपनी मां से मिल ही गया।ये बच्चा कोई आम गुमशुदा नहीं था।एक साल पहले घर से लापता हुआ तो एमपी के रीवा बाल संरक्षण गृह पहुंचा। वहां से उसे ढूंढकर वाराणसी में मां को सौंपा गया। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। बच्चा फिर घर से निकल गया और भटकते-भटकते बांदा के खुरहंड आ पहुंचा।जब बच्चा मिला तो वो अपना नाम-पता तक नहीं बता पा रहा था। मानसिक रूप से कमजोर मासूम की आंखों में सिर्फ एक ही सवाल था-मां कहां है?’
एसपी पलाश बंसल के निर्देशन और एएसपी शिवराज के नेतृत्व में SJPU, AHTU और चाइल्ड हेल्पलाइन की जॉइंट टीम मैदान में उतरी। बच्चे को पहले सुरक्षित चाइल्ड हेल्पलाइन सेंटर भेजा। फिर उसकी फोटो देशभर के चाइल्ड हेल्पलाइन ग्रुपों में घुमाई गई।एमपी के रीवा से खबर आई – ‘ये बच्चा हमारे यहां रह चुका है’। कड़ियां जुड़ती गईं। पता चला कि ये वही बच्चा है जो 1 साल पहले लापता हुआ था और वाराणसी में मां को सौंपा गया था।26 मई को संयुक्त टीम की मेहनत रंग लाई। बच्चे को उसकी मां के हवाले कर दिया गया। बेटे को सीने से लगाते ही मां की आंखें खुशी से छलक पड़ीं। उसने रोते-रोते पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन और हर उस शख्स को दुआएं दीं जिसने उसके लाल को घर पहुंचाया।एसपी पलाश बंसल ने कहा कि ऑपरेशन मुस्कान’ का मकसद ही यही है – हर बिछड़े चेहरे पर मुस्कान लौटाना।















