मुजफ्फरनगर में प्रशासन ने बच्चों में बढ़ती मोबाइल लत को गंभीरता से लेते हुए बड़ा कदम उठाया है। अपर जिलाधिकारी प्रशासन संजय कुमार सिंह ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देश जारी कर जनपद के कक्षा 5 तक संचालित सभी शासकीय, सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों में मोबाइल फोन के माध्यम से होमवर्क, असाइनमेंट अथवा अन्य शैक्षणिक सामग्री भेजने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के आदेश दिए हैं। यह निर्देश उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग, लखनऊ के पत्र संख्या-254 दिनांक 05 फरवरी 2026 के संदर्भ में जारी किया गया है। आयोग ने गाजियाबाद में नवीं मंजिल से कूदकर तीन सगी बहनों द्वारा की गई आत्महत्या की अत्यंत दुःखद और समाज को झकझोर देने वाली घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मोबाइल गेम खेलने की लत और पिता द्वारा इसका विरोध किए जाने को घटना की पृष्ठभूमि में प्रमुख कारण माना गया है। प्रशासन का मानना है कि यह घटना केवल एक परिवार की अपूरणीय क्षति नहीं, बल्कि पूरे समाज और शिक्षा व्यवस्था के लिए चेतावनी है। कम उम्र के बच्चों में मोबाइल के प्रति मानसिक, भावनात्मक और व्यवहारिक आसक्ति तेजी से बढ़ रही है, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। अनियंत्रित गेमिंग, सोशल मीडिया और अन्य अवांछनीय ऑनलाइन गतिविधियां बच्चों के व्यक्तित्व विकास पर नकारात्मक असर डाल रही हैं। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि विद्यालयों में समस्त शैक्षणिक कार्य स्कूल परिसर में ही पूर्ण कराए जाएं और होमवर्क पारंपरिक तरीके से दिया जाए, ताकि बच्चों को अनावश्यक रूप से मोबाइल पर निर्भर न रहना पड़े। केवल विषम एवं अपरिहार्य परिस्थितियों में ही किसी डिजिटल माध्यम का उपयोग किया जा सकेगा। प्रशासन को उम्मीद है कि इस निर्णय से अभिभावकों और शिक्षकों को भी जागरूकता मिलेगी तथा भविष्य में ऐसी हृदयविदारक घटनाओं की पुनरावृत्ति को प्रभावी रूप से रोका जा सकेगा।















