मुजफ्फरनगर में जागरूकता एवं परामर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों को दत्तक ग्रहण, महिला एवं बाल अधिकारों और मानव तस्करी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर जानकारी प्रदान की गई। इस अवसर पर राजकीय विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण अभिकरण की प्रबंधक एवं समन्वयक रितु चौधरी ने विस्तार से बताया कि भारत में गोद लेने की प्रक्रिया पूरी तरह से कानूनी और पारदर्शी है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति या दंपति अगर बच्चा गोद लेना चाहता है, तो इसके लिए उसे केन्द्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) की वेबसाइट पर पंजीकरण करना होता है। दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया में किसी प्रकार की बड़ी फीस नहीं ली जाती, केवल निर्धारित शुल्क ही जमा करना होता है।कार्यक्रम में उन्होंने उपस्थित लोगों को यह भी बताया कि महिला एवं बच्चों का शोषण और मानव तस्करी जैसी सामाजिक बुराइयों को रोकने के लिए समाज को एकजुट होकर काम करना होगा। उन्होंने बताया कि CARA की भूमिका बच्चों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने और पारदर्शी तरीके से दत्तक ग्रहण सुनिश्चित करने की होती है। वहीं, जनपद स्तर पर राजकीय विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण इकाई भी सक्रिय भूमिका निभाती है, जो बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और रखरखाव पर ध्यान देती है।रितु चौधरी ने इस दौरान प्रचार–प्रसार के माध्यम से लोगों को CARA की आधिकारिक वेबसाइट और हेल्पलाइन नंबर भी उपलब्ध कराए ताकि जरूरतमंद लोग सीधे जानकारी प्राप्त कर सकें। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार की भ्रांतियों से बचने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए CARA ही एकमात्र अधिकृत माध्यम है।कार्यक्रम में राजकीय दत्तक ग्रहण इकाई से स्टाफ नर्स मेघा और सोशल वर्कर रेनू रानी भी मौजूद रहीं। इसके अलावा जिला अस्पताल से स्टाफ मोहम्मद जुनेद, डॉक्टर, दिव्यांग NGO “I Hat स्मृति” और ट्रेनर अर्चना विश्वकर्मा ने भी सहभागिता की। वेब कम्युनिटी के माध्यम से ANM ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।इस जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को सही जानकारी देना, भ्रांतियों को दूर करना और दत्तक ग्रहण को कानूनी रूप से अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट किया गया कि दत्तक ग्रहण न केवल एक बच्चे के जीवन को नया भविष्य देता है बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का भी माध्यम है। साथ ही यह संदेश भी दिया गया कि हर बच्चा सुरक्षित और स्नेहमयी वातावरण का हकदार है।यह कार्यक्रम लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ क्योंकि इसमें न केवल दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया की जानकारी दी गई बल्कि महिला एवं बच्चों से जुड़े शोषण और मानव तस्करी की रोकथाम जैसे मुद्दों पर भी जागरूकता बढ़ाई गई। इससे समाज में यह संदेश गया कि जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की है कि वे बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।















