एयर इंडिया ने अपने केबिन क्रू के लिए एक नई और सख्त स्वास्थ्य एवं फिटनेस नीति लागू करने का ऐलान किया है। यह एक मई से प्रभावी होगी। कंपनी का कहना है कि केबिन क्रू एयरलाइन की छवि का सीधे प्रतिनिधित्व करते हैं,ऐसे में उनके लिए पेशेवर और संतुलित व्यक्तित्व बनाए रखना जरूरी है।नई गाइडलाइंस के तहत केबिन क्रू के अचानक वजन (वेट)की जांच की जा सकेगी। ये जांच उड़ान से पहले या बाद में,या फिर ट्रेनिंग के दौरान की जा सकती है। वजन का आकलन पहले से दर्ज ऊंचाई के आधार पर BMI(बॉडी मास इंडेक्स) के जरिए किया जाएगा।
BMI के आधार पर चार श्रेणियां
एयर इंडिया ने BMI को चार कैटेगरी में बांटा है-
- अंडरवेट
- नॉर्मल (18-24.9)
- ओवरवेट
- ओबेस (मोटापा)
नॉर्मल BMI को आदर्श माना गया है। वहीं अंडरवेट या ओवरवेट कर्मचारियों को मेडिकल जांच या फिटनेस टेस्ट पास करने के बाद ही ड्यूटी करने की अनुमति मिलेगी। लेकिन जिनका BMI 30 या उससे अधिक है,उन्हें ‘नॉन-एक्सेप्टेबल’ श्रेणी में रखा गया है।
नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई
यदि कोई कर्मचारी निर्धारित मानकों से बाहर पाया जाता है,तो उसे तुरंत फ्लाइट ड्यूटी से हटाया जा सकता है। इसके अलावा उसे मेडिकल टेस्ट और फिटनेस असेसमेंट से गुजरना होगा। नियमों का पालन न करने पर वेतन कटौती जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।
कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर भी जोर
एयर इंडिया ने स्पष्ट किया है कि यह नीति केवल सख्ती के लिए नहीं,बल्कि कर्मचारियों के स्वास्थ्य और भलाई को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लाई गई है। कर्मचारियों को मेडिकल,वेलफेयर और एचआर टीम से सहयोग लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
हालांकि,बार-बार नियमों का उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके साथ ही उम्र के अनुसार नियमित मेडिकल जांच भी की जाएगी और असामान्य BMI वाले मामलों को इसी नीति के तहत संभाला जाएगा।























































