मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से 14 बच्चों की मौत के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सोमवार को घोषणा की कि राज्य में कोल्ड्रिफ कफ सिरप पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया गया है। यह निर्णय स्वास्थ्य मंत्रालय की उस रिपोर्ट के बाद लिया गया, जिसमें तमिलनाडु स्थित फार्मा कंपनी द्वारा बनाए जा रहे इस सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई। यह रासायनिक पदार्थ बेहद जहरीला होता है और औद्योगिक सॉल्वैंट्स में इस्तेमाल किया जाता है। थोड़ी सी मात्रा भी शरीर में जाने पर यह घातक साबित हो सकती है।
सरकार ने आदेश दिया है कि अगली सूचना तक राज्य के सरकारी और निजी संस्थानों में इस सिरप के आयात, बिक्री और वितरण पर रोक रहेगी। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि सरकार ने जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एडवाइजरी जारी की है, जिसमें लोगों से अपील की गई है कि वे इस कफ सिरप का इस्तेमाल न करें। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने इस सिरप की कोई खरीद नहीं की है और सभी जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों को आदेशों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
इससे पहले मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तराखंड, राजस्थान, तेलंगाना और केरल समेत कई राज्यों ने भी कोल्ड्रिफ कफ सिरप पर बैन लगाया है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने निर्माता कंपनी के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। वहीं मध्य प्रदेश सरकार ने जांच पूरी होने के बाद सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। कांग्रेस नेता कमलनाथ ने मृतक बच्चों के परिजनों को 50-50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है।















