बांग्लादेश में आगामी चुनाव से पहले बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान का मामला सुर्खियों में है। हाल के घटनाक्रम से यह स्पष्ट हो रहा है कि चुनाव आयोग लगातार उनके पक्ष में फैसले दे रहा है। आयोग ने दोहरी नागरिकता वाले उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की अनुमति दी है, जो संविधान के खिलाफ बताई जा रही है। बीबीसी बांग्ला के अनुसार, इस बार 2 दर्जन से अधिक उम्मीदवारों के पास दो देशों की नागरिकता है और अधिकांश बीएनपी से जुड़े हैं। खुद तारिक रहमान बांग्लादेश के अलावा ब्रिटेन के नागरिक हैं और वे बांग्लादेश की दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं।इससे पहले बीएनपी के डिफॉल्टर उम्मीदवारों को भी चुनाव में भाग लेने की अनुमति दी गई है, जिससे विपक्षी दलों ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एनसीपी के नाहिद इस्लाम का कहना है कि आयोग ने नियमों की अनदेखी की है, जबकि जमात नेता अब्दुल ताहिर ने 2008 के चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि शेख हसीना को सत्ता दिलाने के लिए भी इसी तरह की रणनीति अपनाई गई थी।
राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो तारिक रहमान को शेख हसीना और उनकी आवामी लीग का कट्टर विरोधी माना जाता है। उनके परिवार में राजनीतिक अनुभव गहरा है। उनकी मां खालिदा जिया पहले प्रधानमंत्री रह चुकी हैं और उनके पिता जियाउर रहमान राष्ट्रपति पद पर आसीन रह चुके हैं। अगस्त 2024 में शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने के बाद से ही तारिक और उनकी पार्टी ढाका में सक्रिय रहे हैं और राजनीतिक गतिविधियों को तेज कर दिया है।चुनाव में बाहरी प्रभाव भी दिखाई दे रहा है। जनवरी 2026 में चीन, रूस और अमेरिका के राजदूतों ने तारिक रहमान से अलग-अलग मुलाकात की। इस कदम को वैश्विक ताकतों के साथ बीएनपी के रिश्ते मजबूत करने के तौर पर देखा जा रहा है। बीएनपी ने हाल के दिनों में भारत के साथ भी अपने संबंध सुधारे हैं। उदाहरण के लिए, जब खालिदा जिया का निधन हुआ, तब भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर उन्हें श्रद्धांजलि देने ढाका पहुंचे।
अमेरिका, रूस और चीन के राजदूत मिले
जनवरी 2026 में चीन, रूस और अमेरिका के राजदूत तारिक रहमान से अलग-अलग मीटिंग कर चुके हैं. इस मीटिंग को इन राजदूतों को साधने के रूप में देखा जा रहा है. वहीं हाल के दिनों में बीएनपी ने भारत से भी अपने रिश्ते सुधारे हैं. यही वजह है कि जब खालिदा जिया का निधन हुआ, तो भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर उन्हें श्रद्धांजलि देने ढाका गए थे.बीएनपी के लिए बड़े देशों को साधना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट में अमेरिका ने अहम भूमिका निभाई थी. बांग्लादेश की स्थापना साल 1971 में हुई थी.















