वेनेजुएला में ऑपरेशन मादुरो के बाद भी डोनाल्ड ट्रंप के हाथ खाली हैं. वेनेजुएला में डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता परिवर्तन करा दिया. तेल की चाहत में निकोलस मादुरो को हटाकर जेल में बंद कर दिया.तब भी डोनाल्ड ट्रंप की चाहत अधूरी है. जी हां, वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन का मकसद ही था उसके तेल पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कब्जा. वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है. ऐसे में वेनेजुएला के तेल पर प्रभाव बढ़ाना अमेरिका की बड़ी रणनीति का हिस्सा है. लेकिन यहां एक पेच है. वेनेजुएला के पास तेल की कमी नहीं है, बल्कि उसके भारी कच्चे तेल को निकालने, संभालने और बड़े पैमाने पर रिफाइन करने की चुनौती है. डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला के तेल से जो खेल चाहते थे, वह हो नहीं पा रहा. वेनेजुएला का तेल इतना भारी होता है कि उसे रिफाइन करने में ही अमेरिका का तेल निकल जा रहा. ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप की नजर भारत के जामनगर रिफाइनरी पर टिक रही है. डोनाल्ड ट्रंप को यकीन है कि जामनगर से ही उनकी मुरीद पूरी हो कती है. ऐसे में अब सवाल है कि वेनेजुएला के तेल को लेकर ट्रंप के प्लान में जामनगर इतना अहम क्यों है, कैसे ट्रंप की अधूरी चाहत यहां से पूरी हो सकती है?
मादुरो के बाद तेल पर ट्रंप की नजर
दरअसल, वेनेजुएला लंबे समय से अपने विशाल तेल भंडार के कारण दुनिया भर में जाना जाता है. इस साल की शुरुआत में 2026 में निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाए जाने के बाद वहां के तेल क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव बढ़ाने की कोशिश तेज हुई. ट्रंप प्रशासन की रणनीति केवल वेनेजुएला की राजनीति तक सीमित नहीं है. उसकी नजर इस बात पर भी है कि वहां के तेल का उत्पादन कैसे बढ़े, उसे कौन खरीदे और किन रिफाइनरियों में उसका इस्तेमाल हो.
अमेरिका के लिए वेनेजुएला का तेल आर्थिक और रणनीतिक…दोनों लिहाज से अहम है. लेकिन यहां एक बात जानना बहुत जरूरी है. वह यह कि वेनेजुएला तेल के भंडार पर प्रभाव बढ़ा लेने भर से अमेरिका या डोनाल्ड ट्रंप का काम पूरा नहीं होता. जमीन से निकले कच्चे तेल को पेट्रोल, डीजल और दूसरे पेट्रोलियम उत्पादों में बदलने के लिए ऐसी रिफाइनरियों की जरूरत होती है, जो उस खास तरह के तेल को प्रोसेस कर सकें. वह भी ऐसी कीमत पर, जो दुनिया के खरीदारों के लिए मुनासिब हो. बस यहीं पर सारा मामला फंस जा रहा है.
वेनेजुएला का तेल ही ट्रंप के लिए चुनौती क्यों?
वेनेजुएला का तेल सामान्य हल्के कच्चे तेल जैसा नहीं है. यह बहुत भारी और गाढ़ा होता है. इसे रिफाइन करने में अच्छी-अच्छी कंपनियों का तेल निकल जाता है. वेनेजुएला के तेल में गाद और सल्फर की मात्रा अधिक होती है. ऐसे तेल को रिफाइन करना आसान नहीं होता. इसके लिए खास मशीनों, आधुनिक तकनीक और जटिल प्रोसेसिंग यूनिट वाली रिफाइनरियों की जरूरत पड़ती है.
कहां फंसा है पेच?
यही वजह है कि वेनेजुएला के तेल को लेकर केवल उत्पादन बढ़ाने की बात काफी नहीं है. उसे बाजार तक सही कीमत में पहुंचाना और फिर उपयोगी ईंधन में बदलना भी उतना ही जरूरी है. अगर तेल निकाल लिया जाए, लेकिन उसे सही तरीके से प्रोसेस करने की क्षमता न हो, तो उसकी पूरी आर्थिक कीमत हासिल करना मुश्किल हो सकता है. डोनाल्ड ट्रंप की चाहत बस यहीं अधूरी रह जा रही है.अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जामनगर की यात्रा की.
वैसे तो अमेरिका की कुछ रिफाइनरियां भी भारी कच्चे तेल को प्रोसेस कर सकती हैं. मगर उसके बाद विशाल मात्रा में रिफाइन करने की क्षमता नहीं है. अगर अमेरिकी रिफाइनरियां वेनेजुएला का तेल रिफाइन कर भी लें तो उसकी लागत बहुत अधिक आएगी. यही कारण है कि ट्रंप की नजर भारत के जामनगर पर है. इसकी वजह है उसकी रिफाइनरी प्रोसेसिंग क्षमता.
जामनगर से कैसे पूरी हो सकती है ट्रंप की मुराद?
जी हां, यहीं भारत के गुजरात में स्थित जामनगर रिफाइनरी की अहमियत सामने आती है. रिलायंस इंडस्ट्रीज का जामनगर परिसर दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में शामिल है. इसकी कुल रिफाइनिंग क्षमता करीब 14 लाख बैरल प्रतिदिन बताई जाती है. यहां अलग-अलग किस्म के कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता है, जिसमें भारी और अधिक सल्फर वाले तेल की प्रोसेसिंग भी शामिल है. वेनेजुएला के तेल को रिफाइन करने के लिए जामनगर बेस्ट रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का जानगर दौरा इसी संदर्भ में देखा जा रहा है.
ट्रंप की योजना में जामनगर क्यों अहम?
इस तरह से देखा जाए तो डोनाल्ड ट्रंप की असली चुनौती यह नहीं है कि वेनेजुएला का तेल रिफाइन करने के लिए अमेरिका के पास कोई व्यवस्था ही नहीं है. चुनौती यह है कि तेल उत्पादन, पुरानी पड़ चुकी तेल सुविधाओं, परिवहन, निवेश और रिफाइनिंग की पूरी व्यवस्था को किस तरह एक साथ आगे बढ़ाया जाए. जामनगर जैसी बड़ी रिफाइनरी इस प्रक्रिया को गति देने में मदद कर सकती है. इस तरह मादुरो को हटाने के बाद वेनेजुएला के तेल पर प्रभाव बढ़ाना ट्रंप की रणनीति का एक हिस्सा है, लेकिन तेल को वास्तविक कमाई में बदलने के लिए उत्पादन से लेकर रिफाइनिंग तक की पूरी व्यवस्था जरूरी है. इसी कड़ी में जामनगर की बड़ी क्षमता डोनाल्ड ट्रंप की चाहत को पूरी कर सतकी है.















