शामली में गन्ने का सीजन शुरू होने के साथ ही गांवों में कोल्हू चलने लगे हैं। कोल्हुओं पर गुड़ और शक्कर बनाने का काम काम शुरू हो गया है, लेकिन शुरुआती दौर में कम रिकवरी ने कोल्हू संचालकों की चिंता बढ़ा दी है। संचालकों के मुताबिक, गन्ने से अभी करीब 10 प्रतिशत ही रिकवरी मिल रही है। इसके चलते गुड़-शक्कर का उत्पादन कम हो रहा है और लागत के मुकाबले मुनाफा नहीं मिल पा रहा है। गन्ना 400 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक भाव पर खरीदने के बावजूद संचालकों को बचत करना मुश्किल हो रहा है।भैंसवाल गांव निवासी वाजिद ने बताया कि उन्होंने 2 अक्टूबर से अपना कोल्हू शुरू कर दिया था। शुरुआत में गन्ने से गुड़ और शक्कर तैयार करने का काम किया जा रहा है, लेकिन गुड़-शक्कर में अपेक्षित मिठास नहीं आ रही है। इसके चलते शक्कर में मिठास बढ़ाने के लिए चीनी मिलानी पड़ रही है। इससे उत्पादन की लागत बढ़ रही है और मुनाफे पर असर पड़ रहा है।
गन्ने के भाव और बाजार पर टिकी नजर
कोल्हू संचालकों का कहना है कि गन्ने की खरीद महंगे भाव पर करनी पड़ रही है, जबकि गुड़ और शक्कर के बाजार भाव में उतार-चढ़ाव बना रहता है। ऐसे में उत्पादन लागत निकालना भी चुनौती बन रहा है।फिलहाल कम रिकवरी के कारण कोल्हू संचालकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्हें उम्मीद है कि गन्ने की रिकवरी बढ़ने पर गुड़ और शक्कर के उत्पादन में सुधार होगा और कारोबार में बचत निकल सकेगी।
मिलें शुरू नहीं, खेत खाली करने की भी मजबूरी
जिले में अभी चीनी मिलों का पेराई सत्र शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में जिन किसानों को अपने खेतों में सरसों या गेहूं की बुवाई करनी है, वे खेत खाली करने के लिए गन्ना कोल्हुओं पर डाल रहे हैं। इससे कोल्हुओं पर गन्ने की आवक बनी हुई है। किसानों के लिए समय पर खेत खाली करना जरूरी है, वहीं कोल्हू संचालक कम रिकवरी और बाजार में भाव के उतार-चढ़ाव के बीच कारोबार चलाने को मजबूर हैं।














