कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता और डायमंड हार्बर सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ लगातार दर्ज हो रही आपराधिक शिकायतों पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है. सोमवार ( 7 सितंबर) को कोर्ट कहा कि अब बहुत हो गया. इसके साथ ही कोर्ट ने यह संकेत भी दिया कि अगर बनर्जी के खिलाफ इसी तरह शिकायतें और FIR दर्ज होती रहीं तो भविष्य में नई FIR दर्ज करने से पहले कोर्ट की इजाजत लेना अनिवार्य किया जा सकता है.यह बात तब कही गई जब हाई कोर्ट को बताया गया कि पहले से मिली अंतरिम सुरक्षा के बावजूद सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कई आपराधिक शिकायतें दर्ज की जा रही हैं.
बस बहुत हो गया
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा ‘बस बहुत हो गया, मैं 4 मई से यही सुनता आ रहा हूं. अब मैं उसी आदेश के आधार पर आदेश देने जा रहा हूं जो सुवेंदु अधिकारी के मामले में एक कोऑर्डिनेट बेंच ने दिया था’. कोर्ट ने फिलहाल अभिषेक बनर्जी के खिलाफ 30 नवंबर तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया.
शिकायत की प्रकृति पर उठाए सवाल
कोर्ट एक ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रहा था जो क्लिनिकल प्रैक्टिस और नकली दवाओं से जुड़ी गड़बड़ियों की शिकायत पर दर्ज FIR से संबंधित थी. अभिषेक बनर्जी की तरफ से सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन पेश हुए. सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने शिकायत की प्रकृति पर असंतोष जाहिर किया साथ ही सवाल उठाया कि बिना किसी जांच के बनर्जी की संलिप्तता साबित हुए बिना आरोपों को उनसे कैसे जोड़ा जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि जांच के बिना यह कैसे माना जा सकता है कि आरोपों का अभिषेक बनर्जी से कोई संबंध है.
‘मैंने व्यक्तिगत रूप से तीन शिकायतें देखी…’
कोर्ट ने कहा ‘मैंने व्यक्तिगत रूप से तीन शिकायतें देखी हैं. इनमें से किसी का भी याचिकाकर्ता से कोई संबंध नहीं है. कोर्टने आगे कहा कि हालांकि पुलिस अपनी जांच जारी रख सकती है, लेकिन इस स्तर पर बनर्जी से हिरासत में पूछताछ करना सही नहीं है. कोर्ट ने कहा ‘आप जांच करें और आरोप पत्र दाखिल करें. हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है’.
‘शिकायतकर्ता ने पहले जानकारी क्यों नहीं दी’
राज्य के एडिशनल एडवोकेट जनरल ने कोर्ट में दलील दी कि मामला फर्जी दवाओं से जुड़ा है और शिकायतकर्ता ने इस मामले में सच सामने लाने वाले व्यक्ति के रूप में शिकायत की. इस पर कोर्ट ने पूछा किया कि इन आरोपों का अभिषेक बनर्जी से क्या संबंध है. इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी पूछा कि अगर शिकायतकर्ता को इसकी जानकारी थी तो उसने एक साल पहले शिकायत क्यों नहीं की.
‘अभिषेक से हारने वाला शिकायतें दर्ज करा रहा’
इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी ध्यान दिलाया कि शिकायतकर्ता वही व्यक्ति है, जो अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ चुका है और दो बार हार चुका है. कोर्ट ने कहा वही व्यक्ति जो उनसे दो बार हार चुका है, शिकायतें दर्ज करा रहा है. राज्य की तरउ से हालांकि कहा गया कि भले ही कथित कृत्य सीधे अभिषेक बनर्जी ने न किए हों, लेकिन जांच में उनके अधीनस्थों के माध्यम से आरोपों से उनका संबंध सामने आ सकता है.
‘जांच जारी रह सकती है लेकिन…’
कोर्ट ने कहा कि जांच जारी रह सकती है, लेकिन संकेत दिया कि वह इस स्तर पर बनर्जी के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई की अनुमति देने के लिए इच्छुक नहीं है. कोर्ट ने कहा ‘अपनी जांच जारी रखें, लेकिन इस स्तर पर कोई दंडात्मक कदम न उठाएं. मैं शिकायत से संतुष्ट नहीं हूं’. कोर्ट ने 30 नवंबर तक बनर्जी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया.























































