कानून हाथ में लेने वालों पर हो एक्शन

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट के दौरान हुई लाठीचार्ज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. शीर्ष अदालत ने कहा कि छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिंसा करने वालों और कानून को अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. साथ ही नीट परीक्षा का विरोध कर रहे छात्रों पर पुलिस की ज्यादतियों से जुड़े सभी आरोपों की भी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच जरूरी है. प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर तय नियमों का उल्लंघन होता है, तो कानून को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए. बता दें कि CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच मामले की सुनवाई कर रही है.

मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि हमें नहीं लगता कि लंबी-चौड़ी दलीलों की जरूरत है. यह छात्रों का पूरी तरह से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन था जिसमें कुछ मांगें रखी गई थीं. यह संवैधानिक दायरे में था. उनका कहना है कि इस तरह के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में हमेशा बिन बुलाए मेहमान आ जाते हैं. वे अपने एजेंडे के साथ आते हैं और जल्द ही वे सह-आयोजक बन जाते हैं. छात्रों की ओर से कहा गया है कि संवैधानिक अधिकार होने के बावजूद, उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया.

दलीलें और उस पर कोर्ट का जवाब

  • सीनियर वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि यह मामला देश भर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है. सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश, नागपुर, बिहार वगैरह में भी ऐसी घटनाएं हुई हैं. कई घटनाएं हैं. इस पर CJI ने कहा कि सभी याचिकाओं में कुछ आरोप लगाए गए हैं, लेकिन अगर मोटे तौर पर देखें तो एक मामला पेलेट गन के इस्तेमाल का है, जिसकी वजह से 19 साल के लड़के की आंखों की रोशनी चली गई. इलेक्ट्रिक बैटन के इस्तेमाल के मामले भी हैं. एक युवती को ICU में भर्ती कराना पड़ा, कील लगी लाठियों का इस्तेमाल किया गया, जिससे जानलेवा चोटें आईं.
  • कोर्ट ने कहा कि एक मीडियाकर्मी पर हमले का मामला भी है, जिसका जिक्र कल भी किया गया था. उस पर बेरहमी से हमला किया गया, फिर सादे कपड़ों में पुलिस द्वारा हिंसा की गई. एक और मामला है जिसमें बिना किसी उकसावे के एक पुलिसकर्मी ने युवती को थप्पड़ मारा. आज ज्यादती को लेकर एक अलग याचिका भी दायर की गई है.
  • वकील गोपाल ने कहा कि जंतर-मंतर के लिए कोई आदेश नहीं था. पुलिस के लिए प्रोटोकॉल है कि वे लाउडस्पीकर पर घोषणा करें कि वे क्या करने जा रहे हैं, जैसे वॉटर कैनन का इस्तेमाल, पैरों के नीचे लाठी चलाना. आंसू गैस का इस्तेमाल बाद का कदम है. इस पर सीजेआई ने कहा कि हर स्टेकहोल्डर को रचनात्मक सुझाव देने चाहिए. इस कोर्ट ने पहले जो प्रोटोकॉल सुझाया था, समय के साथ, बहुत सी चीजें अब गैर-पारंपरिक तरीके से हो रही हैं. हमें इस बात पर गौर करना होगा कि किस तरह की आंसू गैस वगैरह का इस्तेमाल किया जाता है और क्या इसकी इजाजत दी जानी चाहिए. लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन तो होंगे ही.
  • गोपाल ने कहा कि एक ASI ने खुद कार की खिड़कियां तोड़ीं. इसका वीडियो भी है. इन लोगों ने मनमानी की. हम चाहते हैं कि जिम्मेदारी ऊपर के अधिकारियों की तय की जाए. जब ​​तक यह कोर्ट ऐसा नहीं करता, पुलिस को लगता है कि वे बच निकलेंगे. इस पर सीजेआई ने कहा कि जांच पूरी तरह से स्वतंत्र होनी चाहिए. जिसने भी ज्यादती की है, कानून अपना काम करेगा. अगर किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की जाती, तो जांच का कोई मतलब नहीं है.

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