मुज़फ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के प्रथम उपमुख्यमंत्री, किसान नेता और जनसेवा के लिए समर्पित रहे स्वर्गीय बाबू नारायण सिंह की 39वीं पुण्यतिथि पर रविवार को ग्राम नसीरपुर स्थित प्रेरणा स्थल पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बिजनौर, मुज़फ्फरनगर तथा आसपास के जनपदों से हजारों किसान, सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और आम नागरिक शामिल हुए। सभी ने पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और उनके बताए आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन से हुई, जिसके बाद उपस्थित लोगों ने बाबू नारायण सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके संघर्षपूर्ण जीवन और समाज सेवा के योगदान को याद किया। पूरे आयोजन में उनका जीवन संदेश “संघर्ष ही जीवन है” लोगों के लिए प्रेरणा का केंद्र बना रहा। वक्ताओं ने कहा कि बाबू नारायण सिंह ने अपना संपूर्ण जीवन किसानों, गरीबों, मजदूरों और समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। वर्ष 1967 में प्रदेश की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनने पर वे उत्तर प्रदेश के प्रथम उपमुख्यमंत्री बने और किसान हित, ग्रामीण विकास तथा जनकल्याण को अपनी राजनीति का आधार बनाया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मोरना क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने सादगी, ईमानदारी और जनसेवा की ऐसी मिसाल कायम की, जिसे आज भी लोग सम्मान के साथ याद करते हैं। श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि बाबू नारायण सिंह ने कभी पद या सत्ता को महत्व नहीं दिया, बल्कि जनता के विश्वास को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत माना। यही कारण है कि उनके निधन के लगभग चार दशक बाद भी उनकी लोकप्रियता और विचार समाज के लिए प्रेरणा बने हुए हैं।
इस अवसर पर बिजनौर के सांसद चंदन चौहान ने कहा कि उनके दादा बाबू नारायण सिंह का जीवन उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास ही उनके परिवार की सबसे बड़ी पूंजी है और वे अपने दादा के आदर्शों का अनुसरण करते हुए पूरी निष्ठा और ईमानदारी से जनसेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने बाबू नारायण सिंह के संघर्ष, सादगी और किसान हितैषी सोच को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प भी लिया।























































