मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने प्रदेश के गन्ना उत्पादक जिलों में अमोनियम सल्फेट उर्वरक को कथित रूप से “भारत एनपीके” नाम से भ्रामक पैकेजिंग के साथ बेचे जाने का गंभीर आरोप लगाते हुए कृषि विभाग से तत्काल उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। संगठन का कहना है कि मुजफ्फरनगर, बिजनौर, शामली, सहारनपुर, हापुड़ सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों से किसानों की लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि अमोनियम सल्फेट के बैगों पर बड़े अक्षरों में “भारत एनपीके” लिखा जा रहा है, जिससे किसान इसे एनपीके उर्वरक समझकर खरीद रहे हैं। भाकियू का कहना है कि यह उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 की भावना के विपरीत है और किसानों को भ्रमित कर आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाला मामला है। संगठन ने कृषि निदेशालय के वर्ष 2016 और 2021 के उन आदेशों का भी हवाला दिया है, जिनमें भ्रामक नाम और पैकेजिंग के माध्यम से उर्वरकों की बिक्री को दंडनीय बताया गया है। संगठन का आरोप है कि जुलाई माह में जिन जनपदों में मैसर्स एच.यू.आर.एल. के माध्यम से एनपीके उर्वरक का आवंटन किया गया, वहां कई स्थानों पर एनपीके के स्थान पर अमोनियम सल्फेट की आपूर्ति की शिकायतें मिली हैं।
भाकियू ने स्पष्ट किया कि उसे अमोनियम सल्फेट की बिक्री से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उसकी वास्तविक पहचान छिपाकर एनपीके का आभास देना किसानों के साथ छल है। संगठन ने उच्चस्तरीय जांच समिति के गठन, संबंधित कंपनियों और विक्रेताओं के स्टॉक की जांच, भ्रामक पैकेजिंग वाले बैचों की बिक्री व वितरण पर रोक, दोषियों के विरुद्ध उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई, संशोधित पैकेजिंग सुनिश्चित करने तथा पूरे प्रदेश में विशेष निरीक्षण अभियान चलाकर जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।























































