उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के टिकुरी गांव से एक ऐसी दुखद और खौफनाक खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है. यहां घाघरा नदी में अचानक आए एक खूंखार मगरमच्छ ने 12 वर्षीय मासूम सुनील को अपना शिकार बना लिया. सबसे ज्यादा दिल दुखाने वाली बात ये है कि बच्चे के चाचा ने उसे बचाने के लिए मगरमच्छ से 8 मिनट तक जिंदगी और मौत की जंग लड़ी, लेकिन वे अपने भतीजे को बचा नहीं सके. इस पूरी घटना और उसके बाद परिवार के विलाप का भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.शुक्रवार दोपहर को जब मासूम सुनील का क्षत-विक्षत शव पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचा, तो उसके चाचा विजय राज सिंह का रो-रोकर बुरा हाल था. उन्होंने भर्राई आवाज में उस खौफनाक मंजर की कहानी बयां की. गुरुवार देर शाम सुनील अपने चाचा विजय राज सिंह और उदय राज सिंह के साथ खेत में धान की रोपाई करने के बाद घर लौट रहा था. रास्ते में हाथ-पैर धोने के लिए सुनील जैसे ही घाघरा नदी के पानी के पास पहुंचा, तभी पानी के भीतर घात लगाए बैठे मगरमच्छ ने चुपके से आकर उसे दबोच लिया.सुनील की चीख सुनते ही उसके चाचा विजय राज ने अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में छलांग लगा दी. उन्होंने करीब 7 से 8 मिनट तक मगरमच्छ के जबड़े से सुनील को खींचने की पूरी कोशिश की, लेकिन जानवर की ताकत के आगे वे बेबस हो गए. मगरमच्छ बच्चे को गहरे पानी में ले गया और वहां 3 से 4 बार हवा में उछालकर पटका. विजय राज ने रोते हुए बताया कि मगरमच्छ ने उनके देखते ही देखते बच्चे के आधे शरीर को अपना निवाला बना डाला.
3 घंटे की तलाश के बाद क्षत-विक्षत हालत में मिला शव
घटना की सूचना मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया. ग्रामीण अरविंद श्रीवास्तव के मुताबिक, मगरमच्छ बीच-बीच में बच्चे को मुंह में दबाकर पानी के ऊपर आता और फिर नीचे चला जाता. ग्रामीणों ने हिम्मत जुटाकर बड़े-बड़े बांस के डंडों की मदद से नदी में तलाश शुरू की. इस बीच स्थानीय पुलिस, वन विभाग और एनडीआरएफ (NDRF) की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं. करीब 3 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद, घटनास्थल से लगभग 300 मीटर की दूरी पर सुनील का क्षत-विक्षत शव पानी में उतराता हुआ मिला. ग्रामीणों ने जाल डालकर शव को बाहर निकाला, जिसे शुक्रवार सुबह पुलिस ने पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा. शाम को गमगीन माहौल में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया.
अनाथ भाई की मौत पर बिलख उठीं बहनें, नम हो गईं सबकी आंखें
इस हादसे ने एक हंसते-खेलते अनाथ परिवार को पूरी तरह उजाड़ दिया है. सुनील के पिता बुधराज की 5 साल पहले और मां की 7 साल पहले बीमारी के कारण मौत हो चुकी थी. चार भाई-बहनों में सुनील दूसरे नंबर पर था और अपने चाचा के साथ रहकर परिवार का सहारा बन रहा था. जैसे ही लाश घर लाई गई, बहनें फूट-फूट कर रोने लगीं. वो उस चादर को बार-बार सहला रही थीं, जिसमें सुनील की लाश को लपेटकर लाया गया था. मासूम बहनों का अपने भाई की आखिरी निशानी (चादर) से लिपटकर रोने का यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर एक व्यक्ति के आंसू छलक पड़े. अब घर में सुमन और सीमा के अलावा छोटा भाई संजय (10) ही बचे हैं.























































