जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने कहा कि कांग्रेस का गठन देश की आजादी के लिए नहीं हुआ था. इसका मुख्य मकसद बढ़ती हिंदू-मुस्लिम दरार को रोकना था. उन्होंने कहा कि 1857 की क्रांति समेत अन्य लड़ाइयों में शहीदों के लिए लड़ रहे लोगों के दबाव में कांग्रेस ने आजादी का एजेंडा अपनाया. जब कोई राजनीतिक दल नहीं था, तब देवबंद के उलेमाओं ने अंग्रेजों के खिलाफ संगठन खड़ा किया था. मदनी ने फिरकापरस्ती (सांप्रदायिकता) की आवाज को दबाने की अपील की.उन्होंने कहा कि पूरे मुल्क को एकजुट होकर तरक्की के लिए काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि हम 1300 साल से यहां रह रहे हैं, मौजूदा माहौल ने हिंदू-मुस्लिम-सीख-ईसाई सबके रिश्तों को कमजोर किया है. हम चुनाव नहीं लड़ते, न लड़ाते हैं, लेकिन ये माहौल भी खत्म हो जाएगा.
‘देश नफरत से नहीं चल सकता’
कुछ समय पहले मदनी ने कई राज्यों में मदरसों और मस्जिदों के खिलाफ की गई “बुलडोजर कार्रवाई” की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने कहा कि देश को नफरत और डर के सहारे नहीं चलाया जा सकता. उन्होंने कहा कि सरकारें तो आती-जाती रहती हैं, लेकिन न्याय और इंसानियत हमेशा कायम रहनी चाहिए. मदनी ने कहा, “कोई भी देश लंबे समय तक नफरत के सहारे नहीं चल सकता. देश प्यार, दया और न्याय से चलता है, नफरत से नहीं. सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन असली सत्ता तो अल्लाह, ॐ और ईश्वर के हाथ में ही होती है.”























































