शापूर जादरान को नम आंखों से अंतिम विदाई,

अफगानिस्तान क्रिकेट जगत ने अपने पूर्व तेज गेंदबाज शापूर जादरान को श्रद्धांजलि देते हुए अंतिम विदाई दी. उनका पार्थिव शरीर बुधवार को काबुल पहुंचा, जहां परिवार के सदस्यों, अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अधिकारियों और मौजूदा तथा पूर्व खिलाड़ियों ने एयरपोर्ट पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.इस दौरान, माहौल बेहद गमगीन रहा और हर किसी की आंखें नम दिखाई दीं. लंबे समय तक अफगानिस्तान क्रिकेट की पहचान रहे शापूर जादरान के निधन ने पूरे देश के क्रिकेट समुदाय को गहरे शोक में डुबो दिया.काबुल में आयोजित अंतिम विदाई समारोह के दौरान कई मौजूदा और पूर्व खिलाड़ी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके. अफगानिस्तान के स्टार स्पिनर राशिद खान अपने पूर्व साथी को अंतिम विदाई देते समय फूट-फूटकर रो पड़े. वहीं, अनुभवी ऑलराउंडर मोहम्मद नबी भी बेहद भावुक नजर आए. दोनों खिलाड़ियों ने अन्य साथियों के साथ मिलकर शापूर जादरान के जनाज़े को कंधा दिया. इस दृश्य ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया. खिलाड़ियों ने एक-दूसरे को गले लगाया, दिवंगत खिलाड़ी की आत्मा की शांति के लिए दुआ की और उनके साथ बिताए पलों को याद किया.

शापूर जादरान का 38 वर्ष की आयु में भारत में इलाज के दौरान निधन हो गया. वह हेमोफागोसाइटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस (HLH) नामक जानलेवा गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. वर्ष 2025 के अक्टूबर महीने में उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद इस बीमारी का पता चला. बाद में उनकी स्थिति चौथे चरण तक पहुंच गई, जिससे शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो गए.

राशिद खान और अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष मिरवाइस अशरफ के प्रयासों से उन्हें इलाज के लिए भारत भेजा गया. 18 जनवरी 2026 को उन्हें नई दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया. उपचार के दौरान उन्हें डेंगू भी हो गया, जिससे उनकी हालत और गंभीर होती चली गई. कुछ समय के लिए सुधार के संकेत मिले, लेकिन अंततः वह लंबे समय तक आईसीयू में रहने के बाद जिंदगी की जंग हार गए.शापूर जादरान को अफगानिस्तान क्रिकेट के शुरुआती दौर के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में गिना जाता है. उन्होंने उस समय टीम का प्रतिनिधित्व किया, जब अफगानिस्तान अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहा था. उनकी तेज गेंदबाजी और जुझारू सोच ने देश के कई युवा खिलाड़ियों को प्रेरित किया और अफगानिस्तान के क्रिकेट सफर को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई.

अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने श्रद्धांजलि संदेश में कहा कि शापूर जादरान केवल एक शानदार क्रिकेटर ही नहीं, बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा के प्रतीक भी थे. उनका संघर्ष, समर्पण और खेल के प्रति जुनून आने वाली पीढ़ियों को हमेशा आगे बढ़ने का हौसला देता रहेगा.उनकी नमाज-ए-जनाजा काबुल की ईदगाह में अदा की गई, जिसके बाद उन्हें मरंजन हिल स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया. पूरे अफगानिस्तान क्रिकेट परिवार ने नम आंखों से अपने इस साथी को विदाई दी. शापूर जादरान भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन अफगानिस्तान क्रिकेट में उनके योगदान और विरासत को हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा.

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