मुजफ्फरनगर। होली चाइल्ड पब्लिक इंटर कॉलेज, जड़ौदा में आर्ट ऑफ लिविंग के तत्वावधान में शिक्षकों के लिए प्रेरणादायक कार्यशाला “आर्ट ऑफ टीचिंग बाय आर्ट ऑफ लिविंग” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों के व्यक्तित्व विकास, मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाना तथा शिक्षा के क्षेत्र में उनकी भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाना रहा। कार्यशाला का शुभारंभ आर्ट ऑफ लिविंग के प्रशिक्षक धीरज बत्रा एवं पूनम शर्मा सहित विद्यालय परिवार के पदाधिकारियों और शिक्षकों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और योग, ध्यान तथा जीवन प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
कार्यशाला के दौरान धीरज बत्रा एवं पूनम शर्मा ने शिक्षकों को सूक्ष्म योग, प्राणायाम और ध्यान की विभिन्न विधियों का अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में शिक्षकों पर शैक्षणिक दायित्वों के साथ-साथ कई प्रकार की प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी होती हैं, जिसके कारण मानसिक तनाव बढ़ सकता है। ऐसे में नियमित योग और ध्यान शिक्षकों को मानसिक रूप से मजबूत, शांत और संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। शिक्षक अपने ज्ञान, व्यवहार और संस्कारों के माध्यम से विद्यार्थियों के जीवन को नई दिशा देता है तथा उनमें नैतिक मूल्यों और जिम्मेदार नागरिकता की भावना विकसित करता है।
धीरज बत्रा ने कहा कि नियमित मेडिटेशन से एकाग्रता बढ़ती है, तनाव कम होता है, सकारात्मक सोच विकसित होती है और कार्य क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। इससे शिक्षक अधिक ऊर्जा और उत्साह के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकते हैं तथा विद्यार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन प्रदान कर सकते हैं। वहीं पूनम शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि एक आदर्श शिक्षक ज्ञानवान होने के साथ-साथ अनुशासित, धैर्यवान, ईमानदार, निष्पक्ष, संवेदनशील और प्रेरणादायी व्यक्तित्व का धनी होता है। शिक्षक का कार्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का निर्माण करना और उन्हें जीवन में सही दिशा प्रदान करना भी है।
कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्य प्रवेन्द्र दहिया ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी कार्यशालाएं शिक्षकों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। उन्होंने सभी शिक्षकों से नियमित योग और ध्यान को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। कार्यशाला के समापन पर शिक्षकों ने स्वस्थ, सकारात्मक और तनावमुक्त जीवन के लिए नियमित योग एवं ध्यान करने का संकल्प लिया।























































