मुजफ्फरनगर। कृषि निदेशक, उत्तर प्रदेश, कृषि भवन लखनऊ के निर्देशों के अनुपालन में जनपद मुजफ्फरनगर में नेशनल प्रोजेक्ट ऑन सॉयल हेल्थ एंड फर्टिलिटी कार्यक्रम के अंतर्गत व्यापक स्तर पर विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत जनपद की 36 ग्राम पंचायतों में मृदा नमूनों का संग्रहण किया गया, ताकि किसानों को उनकी भूमि की वास्तविक स्थिति की जानकारी उपलब्ध कराई जा सके और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा दिया जा सके।
अभियान के दौरान उप कृषि निदेशक प्रमोद कुमार सिरोही ने विकासखंड जानसठ की ग्राम पंचायत ढांसरी का दौरा किया। यहां उन्होंने किसान सोनू पुत्र शेर सिंह के खेत से स्वयं मृदा नमूना एकत्रित किया और किसानों को मृदा परीक्षण के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने तथा फसलों का बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए नियमित रूप से मिट्टी की जांच कराना अत्यंत आवश्यक है। मृदा परीक्षण के माध्यम से खेत में उपलब्ध पोषक तत्वों की सही जानकारी प्राप्त होती है, जिसके आधार पर किसान आवश्यक उर्वरकों और अन्य कृषि निवेशों का संतुलित उपयोग कर सकते हैं।
किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि खेती को लाभकारी बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड में मिट्टी में उपलब्ध नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश सहित अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की स्थिति तथा उनके अनुसार उर्वरकों के उपयोग की सिफारिशें दर्ज होती हैं। यदि किसान इन संस्तुतियों का पालन करते हुए खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग करें तो उत्पादन लागत में कमी आती है और फसल की गुणवत्ता तथा पैदावार दोनों में वृद्धि होती है।
अभियान के दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने किसानों को मिट्टी के संरक्षण, जैविक पदार्थों के उपयोग, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा पर्यावरण अनुकूल खेती के संबंध में भी जागरूक किया। किसानों को बताया गया कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है, इसलिए वैज्ञानिक सलाह के अनुसार ही कृषि निवेशों का उपयोग किया जाना चाहिए।
कृषि विभाग द्वारा संचालित इस विशेष अभियान का उद्देश्य किसानों को उनकी भूमि की वास्तविक उर्वरा क्षमता से अवगत कराना तथा उन्हें वैज्ञानिक खेती की ओर प्रेरित करना है। विभाग का मानना है कि मृदा परीक्षण और मृदा स्वास्थ्य कार्ड की सिफारिशों के अनुरूप खेती करने से न केवल फसल उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी। अभियान के अंतर्गत विभिन्न ग्राम पंचायतों में मृदा नमूने एकत्रित कर उन्हें परीक्षण के लिए प्रयोगशालाओं में भेजा जा रहा है, जिसके बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराए जाएंगे।























































