मुजफ्फरनगर। विश्व थायरॉयड दिवस के अवसर पर जिला महिला चिकित्सालय मुजफ्फरनगर में नवजात शिशुओं में जन्मजात थायरॉयड कमी (कंजेनिटल हाइपोथायरॉयडिज्म) की समय पर पहचान और उपचार को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण एवं सेमिनार का आयोजन किया गया। अस्पताल के प्रथम तल स्थित मीटिंग हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सीएमएस डॉ. आभा आत्रेय ने की। कार्यक्रम का संचालन एसएनसीयू के नोडल ऑफिसर डॉ. अनुज राजवंशी द्वारा किया गया। सेमिनार का मुख्य विषय “Congenital Hypothyroidism – Early Diagnosis & Management in Newborns” रहा, जिसमें नवजात शिशुओं में थायरॉयड हार्मोन की कमी से होने वाली गंभीर समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
सेमिनार में चिकित्सकों, स्टाफ नर्सों तथा पैरामेडिकल स्टाफ को नवजात शिशुओं में जन्मजात थायरॉयड कमी के शुरुआती लक्षणों की पहचान, आवश्यक जांच और समय पर उपचार के बारे में प्रशिक्षित किया गया। डॉ. अनुज राजवंशी ने बताया कि जन्म के तुरंत बाद यदि इस बीमारी की पहचान नहीं हो पाती तो इसका असर बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास पर पड़ सकता है। ऐसे बच्चों में सीखने की क्षमता प्रभावित होने के साथ-साथ विकास की गति भी धीमी हो सकती है। उन्होंने कहा कि नवजात स्क्रीनिंग के माध्यम से बीमारी का समय रहते पता लगाकर उपचार शुरू कर दिया जाए तो बच्चा पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकता है।
कार्यक्रम के दौरान नवजात स्क्रीनिंग की प्रक्रिया, थायरॉयड जांच के मानक, उपचार प्रबंधन और अभिभावकों को जागरूक करने के तरीकों पर भी विशेष जानकारी दी गई। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने कहा कि जन्म के शुरुआती दिनों में की गई साधारण जांच भविष्य में बच्चे को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकती है। इस अवसर पर डॉ. फैजल परवेज़, डॉ. राधा चौधरी, डॉ. नीरज, डॉ. संयम, डॉ. भावना एवं डॉ. स्वाति सहित कई चिकित्सक मौजूद रहे। सभी ने स्वास्थ्यकर्मियों से नवजातों की नियमित जांच को प्राथमिकता देने और लोगों में जागरूकता बढ़ाने की अपील की। कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को इस गंभीर लेकिन समय रहते नियंत्रित की जा सकने वाली बीमारी के प्रति संवेदनशील और प्रशिक्षित बनाना रहा।























































