अधिवक्ता संघ ने खनन पर प्रतिबंध की मांग

बांदा। पिछले एक सप्ताह से लगातार जिले में पड़ रही रिकार्ड तोड़ गर्मी और हीटवेव के लिए बालू-गिट्‌टी के अंधाधुंध खनन को ही जिम्मेदार माना जा रहा है। आलम यह है कि बांदा का तापमान देश-दुनिया में टॉप रैंकिंग पर कायम है। भीषण गर्मी व हीटवेव के बीच नदियों और पहाड़ों में चल रहे अंधाधुंध खनन को लेकर एक विमर्श शुरू हो गया है। लोगों का मानना है कि दुनिया में सर्वाधिक तापमान के लिए जिले में हो रहा उत्खनन ही जिम्मेदार है। इसी बीच अब बालू-गिट्‌टी के खनन पर रोक लगाने की मांग भी जोर पकड़ने लगी है।शुक्रवार को जिला अधिवकता संघ के अध्यक्ष विमल कुमार सिंह की अगुवाई में वकीलों के प्रतिनिधिमंडल ने मंडलायुक्त अजीत कुमार से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपकर जिले में चल रहे अंधाधुंध खनन पर रोक लगाने की मांग बुलंद की है। कहा है कि पूरे जनपद में व्यापक पैमाने पर चल रहा जीवनदायिनी नदियों और पहाड़ों का दोहन यहां की भौगोलिक परिस्थितयों को बदलने और जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार है। बताया है कि नदियों में जहां भारी भरकम मशीनें व लिफ्टर लगाकर बालू का दोहन किया जा रहा है, वहीं पहाड़ों पर विस्फोटक के जरिए व्यापक नुकसान पहुंचाया जा रहा है। अधिवक्ताओं का कहना है कि पहाड़ों और नदियों का संरक्षण किया जाना बहुत जरूरी है। जिससे जिले का तापमान जीवन के लिए खतरा न बन सके। साथ ही अधिवक्ताओं ने जिले में जंगल को बढ़ाने के लिए भारी पैमाने पर पौधरोपण करने और पौधों का संरक्षण करने की मांग भी उठाई है। कहा है कि यदि जल्द ही नदियों, पहाड़ों और जंगलों का दोहन नहीं रोका गया तो वह समय दूर नहीं जब बांदा जनपद का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। अधिवक्ता संघ ने आयुक्त से खनिज व जंगलों के दोहन पर रोक लगाने और जनपद के अस्तित्व के साथ ही मानव सभ्यता को बचाने की पहल करने की मांग की है। इस मौके पर जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष अशोक दीक्षित, शिवपूजन सिंह पटेल, विनोद सिंह समेत तमाम अधिवक्ता शामिल रहे।

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