ईरान जंग को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने बीजिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से चर्चा की है. चीन की स्थानीय मीडिया के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच यूक्रेन और रूस युद्ध को लेकर भी बात हुई है. यह ट्रंप के उस दावे के ठीक उलट है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मुझे ईरान युद्ध रोकने के लिए चीन की जरूरत नहीं है. सीएनएन ने स्थानीय मीडिया के हवाले से बताया कि राष्ट्रपति जिनपिंग से ट्रंप ने मिडिल ईस्ट में शांति लाने को लेकर बात की. हालांकि, दोनों के बीच क्या बातचीत हुई है, उसकी डिटेल नहीं आई है.
24 घंटे पहले कहा था- चीन की जरूरत नहीं
डोनाल्ड ट्रंप जब बीजिंग दौरे के लिए अमेरिका से निकल रहे थे, तब पत्रकारों ने उनसे चीन को लेकर सवाल पूछा था. ट्रंप का कहना था कि उन्हें समझौते के लिए चीन की मदद की जरूरत नहीं है. हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने बैकडोर से जरूर चीन से संपर्क साधा.अमेरिका के विदेश मंत्री ने बीजिंग पहुंचने से पहले पत्रकारों से कहा कि अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान पर दबाव डाले, ताकि खाड़ी में ईरान का रूख बदल सके. विदेश मंत्री ने आगे कहा कि चीन अगर ईरान पर दबाव डालेगा, तो बात बन सकती है दूसरी तरफ चीन भी मध्यस्थता की प्रक्रिया में अपनी भूमिका बढ़ा दी है. बुधवार को चीन के विदेश मंत्री ने पाकिस्तान से इसको लेकर बात की. चीन ने कहा कि इसकी प्रक्रिया में तेजी लाने की जरूरत है.
युद्ध खत्म करने के लिए चीन की जरूरत क्यों?
1. ईरान को चीन का करीबी देश माना जाता है. चीन उससे सबसे ज्यादा तेल खरीदता है. बदले में हथियार उसे देता है. ईरान चीन की बात को सिरे से खारिज नहीं कर सकता है.
2. बीजिंग में ईरान के दूत ने 2 दिन पहले एक बयान दिया था. दूत के मुताबिक अगर कोई चीन युद्ध का गारंटर बनता है तो यह जल्द ही खत्म हो सकता है. चीन के कहने पर ही सीजफायर की घोषणा हुई थी.
3. ईरान का कहना है कि अमेरिका भरोसेमंद नहीं है. फिर से हमला कर सकता है. इसके लिए गारंटर की जरूरत है. मध्यस्थता की प्रक्रिया में अभी जो देश लगे हैं, उनके पास इतनी ताकत नहीं है कि वो अमेरिका पर दबाव बना सके.























































